
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में NEET UG काउंसलिंग के बीच मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण का मुद्दा गरमा गया है। डॉ. अंबेडकर डॉक्टर एसोसिएशन (DADA) ने इसके खिलाफ एक बड़े आंदोलन का शंखनाद किया है। एसोसिएशन 16 अगस्त 2026 को लखनऊ के इको गार्डन में एक विशाल शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करने जा रहा है। यह प्रदर्शन सुबह 9 बजे से शुरू होगा।
इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के चार राजकीय मेडिकल कॉलेजों में 70% SC/ST सीट व्यवस्था को सुरक्षित रखना है। ये चार मेडिकल कॉलेज अंबेडकरनगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर में स्थित हैं। DADA के अनुसार, इन संस्थानों की स्थापना मुख्य रूप से स्पेशल कंपोनेंट प्लान (SCP) और ट्राइबल सब-प्लान (TSP) की निधियों से की गई थी। इसका मकसद SC/ST वर्ग का शैक्षणिक सशक्तिकरण करना था। इसलिए इनके आरक्षण में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।
क्या है शासनादेश और आरक्षण का गणित?
एसोसिएशन ने 19 जुलाई 2012 के एक शासनादेश (संख्या: 1164/71-1-2012-जी-264/2011) का हवाला दिया है। इस आदेश के तहत इन चारों कॉलेजों की 100 एमबीबीएस सीटों का विशेष आवंटन तय किया गया था। इसमें अनुसूचित जाति (SC) के लिए 64% और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 06% सीटें निर्धारित की गई थीं। यह कुल मिलाकर 70% आरक्षण बनता है। बाकी सीटों में 15% OBC और 15% अनारक्षित वर्ग के लिए रखा गया था।
DADA की प्रमुख मांगें:
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NEET UG काउंसलिंग में यथास्थिति: महानिदेशालय चिकित्सा शिक्षा (DGME UP) को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं ताकि 2012 के शासनादेश के अनुरूप काउंसलिंग में 70% SC/ST सीट व्यवस्था बनी रहे।
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16 अगस्त के प्रदर्शन के माध्यम से उठाई जा रही मांगों पर शासन स्तर से तुरंत और सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
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स्थायी राज्य अधिनियम (State Act): भविष्य में SC/ST वर्ग के शैक्षणिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए विधानमंडल द्वारा एक ठोस अधिनियम पारित किया जाए।
शासन को भेजा जा चुका है प्रतिवेदन
इस गंभीर मसले पर एसोसिएशन ने पहले ही शासन का दरवाजा खटखटाया है। मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश SC/ST आयोग, समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण और DGME (UP) सहित कई सांसदों और विधायकों को विस्तृत प्रतिवेदन भेजे जा चुके हैं।
DADA के अध्यक्ष और अधिकृत प्रतिनिधि डॉ. देवांश ने इस धरने को सफल बनाने की अपील की है। उन्होंने प्रदेश के सभी सामाजिक संगठनों, छात्र संगठनों, न्यायप्रिय नागरिकों और मीडिया बंधुओं से 16 अगस्त को इको गार्डन पहुंचने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा है कि वंचित और मेधावी छात्रों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सबको एकजुट होना होगा।
क्या है 70 प्रतिशत आरक्षण का आधार
उत्तर प्रदेश के चार राजकीय मेडिकल कॉलेजों (अंबेडकरनगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर) का निर्माण ‘स्पेशल कंपोनेंट प्लान’ (SCP) और ‘ट्राइबल सब-प्लान’ (TSP) फंड से किया गया था। यह फंड विशेष रूप से SC/ST वर्ग के शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिए था, इसलिए यहाँ सामान्य नियमों से अलग विशेष कोटा तय किया गया था।
इसलिए इन कॉलेजों की 100 एमबीबीएस सीटों पर 70% SC/ST आरक्षण लागू किया गया था। इसमें 64% सीटें अनुसूचित जाति (SC) और 06% सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित थीं। शेष में 15% OBC और 15% अनारक्षित वर्ग के लिए निर्धारित थीं।
अभी यह मुद्दा क्यों उठा? (विवाद का मुख्य कारण)
दरअसल अगस्त 2025 में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने इन मेडिकल कॉलेजों में लागू 70% आरक्षण को रद्द कर दिया। कोर्ट ने माना कि यह व्यवस्था 50% की अधिकतम आरक्षण सीमा और ‘यूपी आरक्षण अधिनियम 2006’ का उल्लंघन करती है। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद, इन कॉलेजों में SC/ST कोटे को 70% से घटाकर सामान्य (लगभग 21%) कर दिया गया।
नीट यूजी काउंसलिंग (NEET UG Counselling 2026) में आरक्षण घटने के कारण ही डॉ. अंबेडकर डॉक्टर एसोसिएशन (DADA) ने 16 अगस्त 2026 को लखनऊ के इको गार्डन में आंदोलन का ऐलान किया है। उनकी मुख्य मांग काउंसलिंग में 2012 की यथास्थिति (Status Quo) बहाल करना है।




