Health

एक साल के लम्बे इलाज के बाद शेल्टर होम पहुंचा किशोर

केजीएमयू डॉक्टरों के प्रयास से किशोर को मिला सहारा

लखनऊ। 17 वर्षीय किशोर, जो एक साल पहले ट्रेन से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था, आज भी अपने परिवार की तलाश में है। हादसे के बाद से वह अपने घर और परिजनों का पता बताने की स्थिति में नहीं है। केजीएमयू (KGMU)  के न्यूरोसर्जरी विभाग की टीम ने न केवल उसका लंबे समय तक इलाज कर उसकी जान बचायी बल्कि उसकी पहचान और परिवार तक पहुंचाने के लिए भी हरसंभव प्रयास किया। परिवार का पता न चल पाने पर उसे शेल्टर होम में सहारा दिलाया।

किशोर बीते साल 7 अगस्त को बाराबंकी में ट्रेन से गिर गया था। हादसे के बाद एक पुलिस कांस्टेबल उसे उसी दिन केजीएमयू लेकर पहुंचा, जहां उसे भर्ती किया गया। सीटी स्कैन में सिर में अत्यंत गंभीर चोट सामने आई। चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू किया और 8 अगस्त को उसका ऑपरेशन किया गया। इलाज और देखभाल के बाद उसकी हालत में लगातार सुधार हुआ। हालांकि वह अभी भी स्पष्ट रूप से बोल नहीं पाता है। वह जो थोड़ा-बहुत बोल पाता है, उससे चिकित्सकों को अंदाजा हुआ कि शायद उसका संबंध बाराबंकी या बंकी क्षेत्र से हो सकता है।

स्कूल से थाने और रेलवे स्टेशन तक तलाश

किशोर को उसके परिवार तक पहुंचाने के लिए केजीएमयू के एनेस्थीसिया टेक्नीशियन अतुल उपाध्याय ने विशेष प्रयास किए। वह किशोर को लेकर बाराबंकी और बंकी क्षेत्र के कई स्थानों पर गए। स्कूलों, थानों, मंदिरों और रेलवे स्टेशन पर उसकी पहचान कराने की कोशिश की गई, लेकिन कहीं से भी उसके परिवार या पहचान की जानकारी नहीं मिल सकी। एक साल से अधिक समय तक अस्पताल में रहने के दौरान किशोर की स्थिति में काफी सुधार हुआ। अब वह स्वयं खाना-पीना खा लेता है, टॉयलेट जाता है और आसपास के लोगों को मुस्कुराकर नमस्ते भी करता है। हालांकि बोलने में अभी भी सक्षम नहीं है।

आधार की भी कराई गई पड़ताल

उसकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार कार्ड से संबंधित जानकारी जुटाने का भी प्रयास किया गया। पुराने आधार कार्ड की जानकारी मिलने से लेकर नया आधार कार्ड बनवाने तक की प्रक्रिया में अतुल उपाध्याय ने संबंधित विभागों से कई बार संपर्क किया। काफी प्रयासों के बाद 13 अगस्त को आधार कार्ड बनवाने की प्रक्रिया पूरी हुई। किशोर अब तक शताब्दी फेस-2 के पांचवें तल स्थित न्यूरोसर्जरी वार्ड में भर्ती था। उसके इलाज और देखभाल में सिस्टर प्रिया राय की टीम, डॉ. अभिषेक सिंह तथा अन्य रेजिडेंट डॉक्टरों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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अब मिला सुरक्षित आश्रय

स्वास्थ्य में सुधार के बाद चिकित्सकों ने महसूस किया कि अब उसे अस्पताल से आगे किसी सुरक्षित डेस्टिट्यूट होम अथवा शेल्टर होम में रखा जा सकता है। इसके लिए कई स्तरों पर संपर्क किया गया। इसी दौरान गुरप्रीत सिंह लांबा आगे आए। उन्होंने इससे पहले भी  के कुछ मरीजों को चैरिटी होम्स में स्थानांतरित कराने में मदद की है। गुरप्रीत सिंह लांबा के प्रयास और सहयोग से 14 अगस्त को किशोर को मिशनरीज ऑफ चैरिटी, मोहनलालगंज के शेल्टर होम में स्थानांतरित कर दिया गया।

केजीएमयू के न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष एवं चीफ मेडिकल सुपरीटेंडेंट डॉ. बालकृष्ण ओझा ने इस पूरी प्रक्रिया में सहयोग करने वाले गुरप्रीत सिंह लांबा, अतुल उपाध्याय, सिस्टर प्रिया राय, डॉ. अभिषेक सिंह, रेजिडेंट डॉक्टरों और मिशनरीज ऑफ चैरिटी, मोहनलालगंज की टीम के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास न केवल किसी बेसहारा मरीज को सुरक्षित जीवन देते हैं, बल्कि समाज में मानवीय संवेदना और जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत करते हैं।

फिलहाल किशोर को नया आश्रय तो मिल गया है, लेकिन उसके अपनों की तलाश अभी भी बाकी है। उम्मीद है कि उसकी पहचान से जुड़ी कोई जानकारी सामने आएगी और वह एक दिन अपने परिवार तक पहुंच सकेगा।

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Mahima Tiwari

महिमा तिवारी, द कवरेज में सीनियर पत्रकार हैं। पत्रकारिता में 23 साल का अनुभव रखतीं हैं। वह राजनीति, हेल्थ, लाइफ स्‍टाइल और ह्यूमन एंगल स्टोरीज लिखती हैं। महिलाओं और बच्चों से संबंधित मुद्दों पर भी लिखना पसंद है।

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