Health

जन्म से गुदा द्वार नहीं था, डाक्टरों ने दो मासूमों को दिया नया जीवन

Lucknow: बलरामपुर अस्पताल लखनऊ में जन्मजात गुदा द्वार के नहीं बनने (ARM- Anorectal Malformation) से पीड़ित दो मासूम बच्चियों की जटिल शल्य चिकित्सा सफलतापूर्वक की गई। दोनों बच्चियां जन्म से ही गुदा द्वार न होने के कारण योनि मार्ग से मल त्याग कर रही थीं।

दोनों बच्चियां लगभग 6 एवं 7 माह की हैं तथा जनपद सीतापुर की निवासी हैं। नाबालिग बच्चियों की निजता एवं पहचान की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनके नाम एवं अन्य पहचान संबंधी विवरण परिवर्तित/गोपनीय रखे गए हैं। पहली बच्ची को “निया” (परिवर्तित नाम) तथा दूसरी बच्ची को “आर्या” (परिवर्तित नाम) है। दोनों बच्चियों को जन्म से गुदा द्वार न होने की समस्या के कारण बालरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वरिष्ठ बाल शल्य चिकित्सक डॉ. अखिलेश कुमार द्वारा परीक्षण एवं आवश्यक जांच के बाद दोनों बच्चियों की शल्य चिकित्सा का निर्णय लिया गया।

balrampur hospital arm
सर्जरी करने वाली टीम The coverage

दोनों बच्चियों का ऑपरेशन क्रमशः 19 अगस्त एवं 21 अगस्त 2026 को बलरामपुर अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में किया गया। प्रत्येक ऑपरेशन में लगभग तीन घंटे का समय लगा। जटिल शल्य प्रक्रिया के माध्यम से शरीर की प्राकृतिक संरचना के अनुरूप उचित स्थान पर नया गुदा द्वार बनाया गया। दोनों ऑपरेशन बिना किसी बड़ी जटिलता के सफलतापूर्वक संपन्न हुए।

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ऑपरेशन के बाद दोनों बच्चियों को पीडियाट्रिक वार्ड-3 में स्थानांतरित किया गया है। दोनों बच्चियां सामान्य रूप से मां का दूध ले रही हैं तथा उनके सभी महत्वपूर्ण जीवन संकेतक सामान्य सीमा में हैं। दोनों की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है और शीघ्र ही उन्हें चिकित्सकीय सलाह के अनुसार अस्पताल से छुट्टी दिए जाने की संभावना है।

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव ने कहा, “दोनों बच्चियों की जटिल सर्जरी का सफलतापूर्वक होना अस्पताल की बाल शल्य चिकित्सा सेवाओं की क्षमता को दर्शाता है। मरीजों को बेहतर एवं समयबद्ध उपचार उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है।”

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी ने कहा, “बलरामपुर अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा जटिल मामलों का सफल उपचार किया जा रहा है। दोनों बच्चियों की वर्तमान स्थिति संतोषजनक है और उन्हें निरंतर चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।”

निदेशक डॉ. बी. के. एस. चौहान ने कहा, “यह सफलता पूरी टीम के समन्वित प्रयास का परिणाम है। हमारा प्रयास है कि जरूरतमंद मरीजों को उच्च स्तरीय विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं सरकारी अस्पताल में ही उपलब्ध कराई जाएं।”

इस सफल शल्य चिकित्सा में डॉ. अखिलेश कुमार ( बाल शल्य चिकित्सक), डॉ. महेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ. एस. ए. मिर्जा एवं एनेस्थीसिया टीम, निर्मला मिश्रा (सिस्टर इंचार्ज),  उर्मिला सिंह, सीमा शुक्ला, अंजना सिंह, स्टाफ नर्स कृष्ण तथा ओटी असिस्टेंट राजू का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

बलरामपुर अस्पताल प्रशासन ने पूरी टीम को इस सफल एवं जटिल बाल शल्य चिकित्सा के लिए बधाई दी तथा कहा कि अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता के कारण जन्मजात एवं जटिल रोगों से पीड़ित बच्चों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।

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Mahima Tiwari

महिमा तिवारी, द कवरेज में सीनियर पत्रकार हैं। पत्रकारिता में 23 साल का अनुभव रखतीं हैं। वह राजनीति, हेल्थ, लाइफ स्‍टाइल और ह्यूमन एंगल स्टोरीज लिखती हैं। महिलाओं और बच्चों से संबंधित मुद्दों पर भी लिखना पसंद है।

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