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11 साल तक सीने में फंसा रहा ड्रिल बिट, SGPGI लखनऊ के डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर दर्द से दिलाई निजात

लखनऊ: संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने एक अत्यंत दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण सर्जरी को सफलतापूर्वक करके मरीज को राहत दिलाई है। स्‍पेशलिस्‍ट डॉक्‍टर्स की टीम ने कुशीनगर निवासी अब्‍दुल कादिर (53) नाम के मरीज के सीने में पिछले 11 वर्षों से फंसे ड्रिल बिट (धातु का टुकड़ा) को निकाल कर उसे लंबे समय से हो रहे असहनीय दर्द से निजात दिलाई है। यह ड्रिल 11 साल पहले सर्जरी के दौरान व्‍यक्ति के हड्डी में ही छूट गई थी।

2014 में हुआ था एक्सीडेंट

अपेक्‍स ट्रॉमा सेंटर के डॉ. अमित कुमार सिंह ने बताया कि 3 दिन पहले मरीज आया था, उसका हाथ में काफी विकृति (Deformity) थी। हाथ काफी मुड़ा हुआ था जिससे वह अपने काम नहीं कर पाता था। साथ ही मरीज को चेस्‍ट में भी दर्द की शिकायत थी। हाथ में विकृति, पस निकलने और सीने में भी दर्द की शिकायत के कारण मरीज का सीटी स्‍कैन कराया गया तो पता चला कि मरीज के चेस्‍ट में एक ड्रिल बिड धंसी हुई थी। पिछले 11 साल से मरीज इस ड्रिल बिड के कारण होने वाले दर्द से कराह रहा था।

गौरतलब है कि इस ड्रिल का उपयोग टूटी हड्डी का इलाज करने के दौरान हड्डी में छेद करने के लिए किया जाता है। हो सकता है कि सर्जरी के दौरान ही यह बिड चेस्‍ट में छूट गई हो। लेकिन हाथ में सर्जरी के दौर चेस्‍ट में ड्रिल बिड कैसे पहुंच गई इसको लेकर पीजीआई के डॉक्‍टर्स भी अचम्भित हैं।

फिलहाल संजय गांधी पीजीआई (SGPGI) के डॉ. अमित कुमार सिंह की अगुवाई में डॉक्‍टर्स की टीम ने करीब 45 मिनट की सर्जरी के बाद मरीज को हाथ की हड्ड्डी की समस्‍या को ठीक कर दिया और चेस्‍ट से ड्रिल बिड निकालकर इस समस्‍या से भी निजात दिला दिया है।

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मरीज के साथ कब क्‍या हुआ

जानकारी के अनुसार वर्ष 2014 में एक सड़क दुर्घटना का शिकार हुआ था। इस सड़क दुर्घटना (बस और बाइक की टक्कर) में दाहिने हाथ में चोट लगी थी, जिसके बाद दाहिने हाथ में दर्द और सूजन की शिकायत हुई और हादसे में उसकी दाहिनी बांह की हड्डी (ह्यूमरस) टूट गई थी, जिसका इलाज वर्ष 2015 में किया गया था। इस दौरान मरीज को दाहिनी बांह की हड्डी से जुड़े इलाज और कई बार सर्जरी करानी पड़ी।

जांच में दाहिने ह्यूमरस (हाथ की हड्डी) के शाफ़्ट में फ्रैक्चर पाया गया और लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्‍टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेस (RMLIMS) में अस्पताल में प्लेटिंग के साथ ORIF सर्जरी करके इलाज किया गया।

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मरीज की छाती से निकाली गई ड्रिल बिड

लेकिन 2018 में मरीज़ ज़मीन पर गिर गया, जिससे दाहिने हाथ में फिर से दर्द और विकृति (टेढ़ापन) आ गई। मरीज फिर लखनऊ के RMLIMS अस्पताल गया, जहां 2018 में प्लेट हटा दी गई और नेलिंग की गई।

इसके बाद 2023 में एक बार फिर मरीज़ ज़मीन पर गिर गया, जिससे दाहिने हाथ में दोबारा दर्द और विकृति हुई। वर्ष 2023 में नेलिंग हटा दी गई और फिर से नेलिंग करके इलाज किया गया। 2025 में मरीज़ के घाव से मवाद (pus) निकलने लगा और फरवरी 2026 में नेलिंग हटा दी गई। जहाँ प्लेटिंग के साथ ORIF और बोन ग्राफ्टिंग करके उसका इलाज किया गया।

11 साल तक सीने में बना रहा दर्द का कारण

पूर्व में हुए ऑपरेशन के दौरान वर्ष 2015 में धातु का ड्रिल बिट मरीज के सीने में ही छूट गया था। इसके बाद लगभग 11 वर्षों तक मरीज उसी हालत में जीवन व्यतीत करता रहा। इस पूरे अरसे में उसे सीने के दाहिने हिस्से में लगातार गंभीर दर्द की शिकायत बनी रही। कई जगह इलाज कराने के बाद भी जब राहत नहीं मिली, तो मरीज अंततः एपेक्स ट्रॉमा सेंटर पहुँचा। यहाँ हुई विस्तृत जांच और इमेजिंग में सीने के भीतर फंसी इस विदेशी वस्तु (ड्रिल बिट) की पहचान हुई।

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स्‍पेशलिस्‍ट्स की टीम ने की सफल सर्जरी

लोहे की धातु के इतने लंबे समय से शरीर के अंदर मौजूद रहने के कारण यह मामला बेहद नाजुक और जटिल था। डॉक्टरों की एक संयुक्त विशेषज्ञ टीम ने सफल ऑपरेशन कर ड्रिल बिट को बाहर निकाल दिया। इस जटिल सर्जरी को अंजाम देने वाली टीम में मुख्य रूप से प्रो. अमित कुमार सिंह (ट्रॉमा सर्जरी), डॉ. अमित कुमार (एडिशनल प्रोफेसर, ऑर्थोपेडिक्स), डॉ. आदित्य एवं डॉ. वरुण गुप्ता (सीनियर रेजिडेंट, ट्रॉमा सर्जरी), डॉ. वंश (एडिशनल प्रोफेसर, एनेस्थीसिया) शामिल रहे।

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सफल ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में तेजी से सुधार हो रहा है और उसे वर्षों पुराने सीने के दर्द से पूरी तरह राहत मिल चुकी है। चिकित्सकों का कहना है कि विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की बदौलत ही ऐसे पुराने व गंभीर ट्रॉमा मामलों का सफल उपचार संभव हो पाता है।

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Sunil Yadav

संपादक, लेखक और अनुभवी पत्रकार हैं। वे दैनिक जागरण, आईनेक्‍स्‍ट, कैनविज टाइम्‍स और दैनिक जागरण आईनेक्‍स्‍ट से जुड़े रहे हैं। वह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति, प्रशासनिक ख़बरों, स्वास्थ्य सेवाओं, टेक्‍नोलॉजी से जुड़े विषयों पर लिखते हैं। ट्विटर (X) पर उनसे @sunilyadav21 पर जुड़ सकते हैं।

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