दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिकों में फिर शामिल हुए डॉ. आरके गर्ग

लखनऊ। न्यूरोलॉजी और चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रो. डॉ. आरके गर्ग का नाम एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। डॉ. गर्ग लंबे समय से दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों में अपनी जगह बनाए हुए हैं। उनके शोध कार्यों और वैज्ञानिक प्रकाशनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार पहचान मिल रही है।
डॉ. आरके गर्ग वर्तमान में एरा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, लखनऊ में प्रोफेसर हैं। इससे पहले वह केजीएमयू में प्रोफेसर के तौर पर अकादमिक और रिसर्च कार्य करते रहे हैं। उनके शोध का प्रमुख क्षेत्र न्यूरोलॉजी, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के संक्रमण, न्यूरोट्यूबरकुलोसिस, न्यूरोसिस्टिसरकोसिस सहित कई महत्वपूर्ण विषय रहे हैं। उनके नाम सैकड़ों शोध प्रकाशन दर्ज हैं।
वर्ष 2026 में भी उनका शोध कार्य लगातार अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो रहा है। इस वर्ष उनके नाम से डेंगू से संबंधित स्पाइनल कॉर्ड बीमारी, बोटुलिनम टॉक्सिन उपचार, अल्जाइमर रोग की दवाओं से जुड़े जोखिम तथा केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के संक्रमण जैसे विषयों पर शोध प्रकाशित हुए हैं।
डॉ. गर्ग की यह उपलब्धि लखनऊ के चिकित्सा एवं शोध जगत के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लगातार अंतरराष्ट्रीय शोध प्रकाशनों के माध्यम से उन्होंने न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में अपनी मजबूत वैज्ञानिक पहचान बनाई है।
पीजीआई के 20 डॉक्टर भी वैज्ञानिक सूची में

मरीजों को जटिल से जटिल बीमारियों से राहत देने के साथ पीजीआई के डॉक्टर चिकित्सा अनुसंधान में भी देश का नाम रोशन कर रहे हैं। संस्थान के 20 डाक्टर व वैज्ञानिकों ने दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में जगह बनाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान दर्ज कराई है। इनमें 18 प्रोफेसर और दो पोस्ट-डॉक्टोरल फेलो शामिल हैं। एक ही संस्थान के इतने वैज्ञानिकों का चयन होना यहां हो रहे शोध कार्यों की व्यापकता और गुणवत्ता को दर्शाता है।
स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की ओर से जारी इस वैश्विक सूची में विभिन्न वैज्ञानिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय शोध योगदान देने वाले वैज्ञानिकों को शामिल किया जाता है। एसजीपीजीआई के चिकित्सक-वैज्ञानिकों ने हेपेटोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी, एंडोक्राइन सर्जरी, क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी, क्रिटिकल केयर मेडिसिन, मॉलिक्यूलर मेडिसिन, पेडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी तथा बायोस्टैटिस्टिक्स एवं हेल्थ इंफॉर्मेटिक्स जैसे क्षेत्रों में योगदान दिया है। सूची में संस्थान के निदेशक एवं हेपेटोलॉजी विशेषज्ञ प्रो. आरके धीमन, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के प्रो. राकेश अग्रवाल और प्रो. उदय चंद्र घोषाल, न्यूरोलॉजी के स्वर्गीय प्रो. यूके मिश्रा और प्रो. जयंती कालिता, एंडोक्राइन सर्जरी के प्रो. गौरव अग्रवाल, पेडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के प्रो. उज्ज्वल पोद्दार और प्रो. अंशु श्रीवास्तव, मेडिकल जेनेटिक्स की प्रो. रमा देवी मित्तल तथा नेफ्रोलॉजी के प्रो. नारायण प्रसाद शामिल हैं। इसके अलावा क्रिटिकल केयर मेडिसिन के प्रो. मोहन गुर्जर, हेपेटोलॉजी के प्रो. अमित गोयल और डॉ. अजय कुमार मिश्रा, बायोस्टैटिस्टिक्स एवं हेल्थ इंफॉर्मेटिक्स के प्रो. प्रभाकर मिश्रा और डॉ. मोना पाठक, एंडोक्राइनोलॉजी के डॉ. रोहित सिन्हा, मॉलिक्यूलर मेडिसिन की प्रो. स्वस्ति तिवारी व क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी के डॉ. दुर्गा प्रसन्ना मिश्रा भी सूची में शामिल हैं। वहीं एंडोक्रिनोलॉजी की पोस्ट-डॉक्टोरल फेलो डॉ. सना रजा और हेपेटोलॉजी की रिसर्च एसोसिएट डॉ. मनीषा दुबे ने भी वैश्विक सूची में जगह बनाई है।
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