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KGMU: रजिस्‍ट्रार के रवैये से कर्मचारियों में भारी आक्रोश, VC के हस्तक्षेप के बाद टला कर्मचारियों का Protest, मांगों पर मिला लिखित आश्वासन

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) में आज कर्मचारियों का गुस्सा पूरी तरह से फूट पड़ा। कर्मचारी अपनी लंबित समस्याओं और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से कुलसचिव से मिलने पहुंचे थे। लेकिन, वार्ता न होने पर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के कर्मचारियों में रजिस्‍ट्रार के रवैये को लेकर भारी असंतोष फैल गया है। कर्मचारियों ने रजिस्‍ट्रार पर अड़ियल होने और नकारात्मक कार्यशैली अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है।

हालांकि बाद में कुलपति के हस्‍तक्षेप के बाद कर्मचारियों ने अपने प्रस्तावित आंदोलन को स्थगित कर दिया है। प्रशासन ने कर्मचारियों की मांगों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लिखित आश्वासन दिया है।

कर्मचारियों का आरोप है कि रजिस्‍ट्रार शासन की मंशा के विपरीत काम कर रहे हैं। कर्मचारियों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों और प्रशासनिक कार्यों को अनावश्यक रूप से बाधित किया जा रहा है। इससे पूरे संस्थान के कर्मचारियों में गहरा रोष व्याप्त है।

भीषण गर्मी में इंतजार, Registrar का घेराव

कर्मचारी परिषद ने 18 मई 2026 के पत्र के क्रम में शुक्रवार 22 मई को एक बड़ा कदम उठाया। सुबह भारी संख्या में कर्मचारी एकजुट हुए। सुबह 10 बजे से ही कर्मचारी 44 डिग्री की भीषण गर्मी और प्रचंड धूप में खड़े रहे। घंटों बीत जाने के बाद भी उनकी समस्याओं को नहीं सुना गया। आक्रोशित कर्मचारियों ने सीधे कुलसचिव (Registrar) का घेराव कर दिया। हालात को देखते हुए कुलपति ने मामले में हस्तक्षेप किया।

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बैठक में नहीं आईं Registrar

स्थिति को बिगड़ता देख माननीय कुलपति के प्रतिनिधि और केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. के.के. सिंह (Dr. K. K. Singh) ने बीच-बचाव किया। उनके हस्तक्षेप के बाद ब्राउन हॉल में बातचीत तय हुई। कर्मचारी वहां करीब एक घंटे तक समाधान की आस में बैठे रहे। इसके बावजूद, कुलसचिव इस बैठक में उपस्थित नहीं हुईं। इस उपेक्षा से कर्मचारियों में भारी रोष और अपमान की भावना पैदा हो गई।

पुलिस बुलाने का आरोप और आत्मदाह की चेतावनी

कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच बेवजह पुलिस बुला ली गई। इससे अस्पताल परिसर में डर और तनाव का माहौल बन गया। लगातार हो रही उपेक्षा से कुछ कर्मचारी इतने ज्यादा आक्रोशित हो गए कि वे आत्मदाह जैसा कदम उठाने को तैयार दिखे। हालांकि, मौके पर मौजूद कर्मचारी नेताओं ने उन्हें समझा-बुझाकर शांत कराया।

दिन में संवाद की कोशिशें रहीं नाकाम, शाम को सार्थक वार्ता

कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विकास सिंह और महामंत्री अनिल कुमार ने बताया कि समस्याओं को सुलझाने के लिए कई बार प्रयास किए गए। प्रशासन के साथ सकारात्मक वार्ता की कोशिश की गई। लेकिन, अब तक किसी भी तरह की कोई सार्थक पहल नहीं हुई है। कर्मचारियों की जायज मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है। 

हालांकि शाम के समय कुलपति कार्यालय में एक अहम बैठक बुलाई गई। इस बैठक में माननीय कुलपति और कुलसचिव मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से डॉ. के.के. सिंह, डॉ. सुरेश कुमार और डॉ. प्रेमराज ने हिस्सा लिया। इनके साथ कर्मचारी परिषद के पदाधिकारियों की लंबी और सार्थक बातचीत हुई।

इस वार्ता के बाद एक सकारात्मक नतीजा निकला। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिषद की मांगों पर एक निर्धारित अवधि में कार्रवाई करने का कार्यवृत्त (Minutes) जारी कर दिया।

आंदोलन स्थगित, पर दी सख्त चेतावनी

प्रशासन से मिले इस लिखित आश्वासन के बाद कर्मचारी परिषद ने नरमी बरती है। परिषद ने कल होने वाले प्रस्तावित आंदोलन को अग्रिम आदेशों तक स्थगित करने का निर्णय लिया है।

हालांकि, कर्मचारियों ने प्रशासन को एक सख्त चेतावनी भी दी है। कर्मचारी परिषद ने स्पष्ट किया है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन अपने वादों और आश्वासनों पर खरा नहीं उतरता है, तो वे फिर से कठोर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी पूरी जिम्मेदारी केवल विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।

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मरीजों की सेवाओं पर पड़ सकता है असर

कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि कुलसचिव की कार्यशैली का सीधा असर संस्थान की कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है। अगर हालात नहीं सुधरे, तो मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

कर्मचारी प्रतिनिधियों ने साफ कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ अपने हितों की रक्षा करना नहीं है। वे चाहते हैं कि संस्थान में कामकाज का माहौल बेहतर हो, जिससे मरीजों को बिना किसी रुकावट के सुचारु चिकित्सा सेवाएं मिल सकें। इस पूरे हंगामे और तनाव का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा। अस्पताल की नियमित व्यवस्था बुरी तरह से बाधित हुई। दूर-दराज से आए मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

उत्‍तर प्रदेश संयुक्‍त कर्मचारी परिषद का समर्थन

इस आंदोलन को उत्तर प्रदेश संयुक्त कर्मचारी परिषद का मजबूत समर्थन मिला है। परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा (Atul Mishra) ने कर्मचारियों के साथ मिलकर प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग की है। प्रदर्शन में कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विकास सिंह, महामंत्री अनिल कुमार सहित कई अन्य पदाधिकारी और भारी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे।

कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द और सम्मानजनक समाधान नहीं निकाला गया, तो यह आंदोलन और अधिक व्यापक होगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी केजीएमयू प्रशासन और कुलसचिव की होगी।

प्रशासन से की ये मांग

कर्मचारियों ने शासन और प्रशासन से सख्त मांग कर समस्याओं का तुरंत समाधान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, संस्थान के भीतर एक पारदर्शी, सकारात्मक और सहयोगात्मक कार्य वातावरण स्थापित किया जाए।

Sunil Yadav

संपादक, लेखक और अनुभवी पत्रकार हैं। वे दैनिक जागरण, आईनेक्‍स्‍ट, कैनविज टाइम्‍स और दैनिक जागरण आईनेक्‍स्‍ट से जुड़े रहे हैं। वह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति, प्रशासनिक ख़बरों, स्वास्थ्य सेवाओं, टेक्‍नोलॉजी से जुड़े विषयों पर लिखते हैं। ट्विटर (X) पर उनसे @sunilyadav21 पर जुड़ सकते हैं।

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