
लखनऊ। पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे संघर्ष के कारण पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट (Energy Crisis) गहराता जा रहा है। ऐसे में पेट्रोलियम उत्पादों की बचत समय की सबसे बड़ी मांग बन गई है। इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS) ने एक सराहनीय पहल की है। संस्थान ने परिसर के भीतर छोटी दूरी के लिए डीजल पेट्रोल से चलने वाले वाहनों का उपयोग कम करने के उद्देश्य से शनिवार, 16 मई को एक ‘प्रतीकात्मक साइक्लोथॉन’ (Cyclothon) का आयोजन किया।
शनिवार सुबह 9:00 बजे निदेशक कार्यालय (प्रशासनिक ब्लॉक) से इस साइकिल रैली की शुरुआत हुई। यह रैली पुरानी ओपीडी से होते हुए संस्थान के गेट नंबर 2 तक गई। इसके बाद ईएमआरटीसी (EMRTC), एडवांस्ड डायबिटिक सेंटर और पीएमएसएसवाई (PMSSY) से गुजरते हुए वापस प्रशासनिक ब्लॉक पर आकर संपन्न हुई।
शीर्ष डॉक्टरों ने लिया हिस्सा
इस मुहिम में संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों और डॉक्टरों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर. के. धीमन के नेतृत्व में यह रैली निकाली गई। उनके साथ मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवेंद्र गुप्ता, डीन डॉ. शालीन कुमार और नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. नारायण प्रसाद ने भी साइकिल चलाई।
इनके अलावा एनेस्थिसियोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. संजय धीराज, एंडोक्राइन सर्जरी के प्रमुख डॉ. गौरव अग्रवाल, वित्त अधिकारी शशि भूषण सिंह तोमर और संयुक्त निदेशक (प्रशासन) प्रकाश सिंह भी रैली में शामिल हुए। कई अन्य फैकल्टी सदस्यों, अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों ने भी इस आयोजन में साइकिल चलाई।
पीएम और सीएम की अपील का असर
यह साइक्लोथॉन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस अपील के अनुरूप है, जिसमें नागरिकों से पेट्रोलियम उत्पादों का जिम्मेदारी से उपयोग करने का आग्रह किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को दैनिक यात्रा के लिए निजी वाहनों के बजाय अधिक से अधिक सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के लिए प्रेरित करना है।
स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को फायदा
परिसर में साइकिलिंग को बढ़ावा देने का यह कदम बहुआयामी है। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि संस्थान परिसर का वातावरण भी स्वच्छ रहेगा। इसके साथ ही, डॉक्टरों, कर्मचारियों और छात्रों की शारीरिक फिटनेस में सुधार होगा और उनके बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलेगा।




