निजी आईटीआई संस्थानों ने सरकार के सामने रखीं 6 प्रमुख मांगें, 15 मई को निदेशालय पर प्रदर्शन की चेतावनी

पत्रवार्ता में वक्ताओं ने कहा कि सरकार को निजी आईटीआई संस्थानों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करते हुए व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए, ताकि कौशल विकास की व्यवस्था और अधिक मजबूत हो सके।
फीस वृद्धि तत्काल लागू करने की मांग
प्रतिनिधियों ने कहा कि वर्तमान समय में बिजली, उपकरण रखरखाव, प्रशिक्षकों के वेतन और अन्य संचालन खर्चों में लगातार वृद्धि हुई है, जबकि फीस संरचना पुरानी बनी हुई है। उन्होंने हरियाणा मॉडल का हवाला देते हुए मांग की कि इसी सत्र से फीस वृद्धि लागू की जाए। उनका कहना था कि यदि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो कई संस्थानों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो सकता है।
NIMS पोर्टल पर नोडल वैरिफिकेशन खत्म करने की मांग
संस्थानों ने NIMS पोर्टल पर अतिरिक्त नोडल वैरिफिकेशन प्रक्रिया को अनावश्यक और शोषणकारी बताते हुए इसे समाप्त करने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि प्रशिक्षकों का PAN, Aadhaar, प्रमाणपत्र सत्यापन और OTP आधारित eKYC पहले से ही सफलतापूर्वक हो रहा है, ऐसे में अतिरिक्त वैरिफिकेशन केवल प्रशासनिक बोझ और कार्य में देरी बढ़ाता है।
द्वितीय शिफ्ट बहाल करने की मांग
प्रतिनिधियों ने कहा कि दूसरी शिफ्ट बंद होने से हजारों ऐसे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई है, जो दिन में नौकरी या अन्य कार्य करते हैं और शाम को तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि कौशल विकास का उद्देश्य अधिक से अधिक युवाओं को अवसर देना होना चाहिए, इसलिए सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए दूसरी शिफ्ट पुनः शुरू की जानी चाहिए।
PMKVY 5.0 में निजी संस्थानों को भागीदारी देने की मांग
पत्रवार्ता में कहा गया कि निजी आईटीआई संस्थानों के पास प्रशिक्षित स्टाफ, आधुनिक संसाधन और वर्षों का अनुभव मौजूद है, लेकिन कई सरकारी योजनाओं में उनकी भागीदारी सीमित कर दी जाती है। उन्होंने मांग की कि PMKVY 5.0 सहित सभी कौशल विकास योजनाओं में निजी संस्थानों को समान अवसर दिए जाएं।
यूनिट साइज 45 करने की मांग
संस्थानों ने बढ़ती संचालन लागत को देखते हुए यूनिट साइज 40 से बढ़ाकर 45 प्रशिक्षार्थियों तक करने की मांग उठाई। उनका कहना था कि इससे संस्थानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और अधिक युवाओं को प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा।
API डेटा ट्रांसफर पेनाल्टी वापस लेने की मांग
प्रतिनिधियों ने API डेटा ट्रांसफर में तकनीकी समस्याओं और सर्वर बाधाओं के कारण होने वाली देरी पर लगाए जा रहे भारी जुर्माने को अन्यायपूर्ण बताया। उन्होंने मांग की कि ऐसे दंडात्मक आदेश तत्काल वापस लिए जाएं और तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए व्यावहारिक नीति बनाई जाए।
15 मई को प्रदेशव्यापी प्रदर्शन की घोषणा
पत्रकार वार्ता में यह भी घोषणा की गई कि यदि मांगों पर शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो 15 मई, शुक्रवार को सुबह 10 बजे प्रदेश के सभी जनपदों से प्रशिक्षक, प्रबंधक और प्रशिक्षार्थी बड़ी संख्या में निदेशक प्रशिक्षण, प्रशिक्षण निदेशालय, गुरुगोविंद सिंह मार्ग, लखनऊ पर एकत्रित होकर प्रदर्शन करेंगे। प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि समाधान न होने की स्थिति में अनिश्चितकालीन धरना भी शुरू किया जा सकता है।
संस्थान संचालकों ने कहा कि निजी आईटीआई केवल शिक्षण संस्थान नहीं बल्कि युवाओं के कौशल निर्माण और रोजगार सृजन के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। सरकार यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो इससे प्रदेश के लाखों युवाओं का भविष्य सुरक्षित होगा।




