यूपी में प्रतापगढ़ मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य पर बड़ा एक्शन, हाई लेवल जांच कमेटी गठित

लखनऊ, 30 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत चिकित्सा शिक्षा विभाग ने एक और त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रतापगढ़ स्थित डॉ. सोनेलाल पटेल स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के प्राचार्य के विरुद्ध प्राप्त शिकायत की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया है। समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रतापगढ़ के विधायक राजेन्द्र कुमार मौर्य द्वारा डॉ. सोमनाथ, प्राचार्य, डॉ. सोनेलाल पटेल स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के संबंध में भेजी गई शिकायत पर अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा अमित कुमार घोष ने तत्काल संज्ञान लिया। उनके निर्देश पर महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण (DGME) नेहा शर्मा ने बिना विलंब किए जांच प्रक्रिया शुरू करते हुए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित कर दी।
प्रत्येक बिंदु की होगी जांच
जांच समिति को शिकायत में उल्लिखित प्रत्येक बिंदु की तथ्यपरक, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कहा गया है कि एक सप्ताह के भीतर अपनी आख्या शासन को उपलब्ध कराई जाए, ताकि जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आवश्यक और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति तथा उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ब्रजेश पाठक के मार्गदर्शन में प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से लिया जा रहा है। विभाग का कहना है कि शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता, समयबद्धता और निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद शासन नियमानुसार आवश्यक निर्णय लेगा।
अयोध्या मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य पर भी चल रही जांच
प्रतापगढ़ के अलावा अयोध्या मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार पर भी बड़ा एक्शन हुआ है। कुछ दिन पहले ही डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के सख्त निर्देश पर उनके खिलाफ हाई लेवल जांच बैठा दी गई है। डॉ. ज्ञानेंद्र पर बीमारी के नाम पर अवकाश पर रहने के दौरान 2.12 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता का गंभीर आरोप है।
प्रारंभिक जांच में दोषी पाए जाने के बाद अब यह जांच तेजतर्रार IAS अधिकारी और DGME नेहा शर्मा को सौंप दी गई है। आरोप है कि जनवरी 2023 में छुट्टी पर होने और अपना चार्ज डॉ. पारस खरबंदा को सौंपने के बावजूद डॉ. ज्ञानेंद्र ने GeM पोर्टल पर करीब 84 लाख के टेंडर पास किए। साथ ही 1.28 करोड़ रुपये से अधिक के 17 चेकों पर अवैध रूप से हस्ताक्षर भी कर दिए।




