केजीएमयू कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद की कुर्सी खतरे में

Lucknow: किंग जार्ज मेडिकल यूनिर्विसिटी (KGMU) में चल रहे कथित धर्मांतरण मामले में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब सोशल मीडिया में केजीएमयू कैम्पस की कुछ फोटो वायरल हुईं। फोटो एक धार्मिक आयोजन की थीं जिसमें छात्र, डाक्टर और मौलाना टोपी लगाए दिखाई दे रहे थे। बताया जा रहा है कि एक साल पुरानी फोटो प्रशासनिक भवन में बने सेल्बी हॉल के बाहर की हैं। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानन्द (Dr Sonia Nityanand) ने केजीएमयू कैम्पस में धार्मिक आयोजन की अनुमति दी थी। अगर नहीं तो उनकी मर्जी के बगैर यह कार्यक्रम उनके कार्यालय के पास किसकी अनुमति से हो गया। इन फोटो ने कुलपति की परेशानी इस कदर बढ़ा दी है कि उनके लिए सफाई देना मुश्किल होने लगा है। अगर प्रदेश सरकार ने इन फोटो को गंभीरता से लिया तो कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानन्द की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है।
केजीएमयू में चल रहा धर्मांतरण एवं यौन शोषण मामला कुलपति की गले की हड्डी बन गया है। इस प्रकरण में रोजाना नये खुलासे हो रहे हैं। हालांकि कथित धर्मांतरण का आरोपी रेजिडेंट डाक्टर पुलिस की हिरासत में है। कैम्पस का माहौल तनावपूर्ण है। धार्मिक संगठनों की विरोध को देखते हुए परिसर में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस और पीएसी के सहारे कैम्पस में एक ओर जहां शांति स्थापित की जा रही है वहीं रोजाना सामने आ रहे नये तथ्यों ने कुलपति की प्रशासनिक क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कुलपति के लिए सबसे बड़ी मुसीबत तब खड़ी हो गई जब भाजपा के नेता अभिजात मिश्रा (BJP Leader Abhijat Mishra) ने एक्स पर तीन फोटो पोस्ट कर केजीएमयू में हो रहे कार्यों पर सवाल उठाया। उन्होंने एक्स पर सेल्बी हॉल के बाहर की एक साल पुरानी फोटो पोस्ट करते हुए लिखा कि

अब जवाब देना हो गया मुश्किल
अभिजात मिश्रा की इस पोस्ट ने कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानन्द की परेशानी को कई गुना बढ़ा दिया है। उनके सामने इन फोटो के बारे में सफाई देना मुश्किल हो गया है। कुलपति यह कैसे साबित कर पाएंगी कि फोटो गलत हैं और कैम्पस में कोई धार्मिक आयोजन नहीं हुआ। जबकि फोटो में साफ दिखाई दे रहा है कि फोटो सेल्बी हॉल के बाहर की है और छात्र व डाक्टर धार्मिक परिधान में तकरीर कर रहे हैं। अब उनके सामने बचने का केवल एक विकल्प है कि यह साबित हो जाए कि यह तस्वीरें उनके कार्यालय के पहले की हैं।
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सलाहकार को लेकर उठ रहे सवाल
बताया जा रहा है कि कुलपति ने सर्जरी विभाग के एक प्रोफेसर को अपना सबसे खास सलाहकार बना रखा है। इस सलाहकार का विवादों से पुराना नाता रहा है। इस विवादित प्रोफेसर को कुलपति का करीबी बनने का लाभ यह मिला कि उन्हें केजीएमयू के तीन अहम पदों की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। राजधानी में ही उनका खुद का एक बड़ा निजी अस्पताल भी चलता है। बताया जाता है कि इस सलाहकार का नाम भ्रष्टाचार के कई मामलों में जुड़ चुका है। खरीद-फरोख्त में मोटा कमीशन ऐंठने में यह काफी माहिर है।
शायद यही वजह है कि कुलपति ने उनका अपना सलाहकार बनाया है और बीते कुछ माह में केजीएमयू में करोड़ों रुपये की मशीनें खरीदी जा चुकी है। धर्मांतरण और यौन शोषण के इस मामले को शुरुआती दौर में दबाने की सलाहकार ने बहुत कोशिश की और अब भी वह इसी काम में लगे हैं। केजीएमयू की कई फैकल्टी का मामना है कि अगर जांच का दायरा सलाहकार तक पहुंचा तो इस प्रकरण के अलावा कई अन्य मामले भी खुल सकते हैं। यही वजह है कि सलाहकार चाहते हैं कि जल्द से जल्द यह मामला शांत हो जाए।
डैमेज कन्ट्रोल का जिम्मा सलाहकार पर
जनरल सर्जरी विभाग के इस प्रोफेसर और सलाहकार को केजीएमयू की छवि सुधार का जिम्मा भी सौंपा गया है। मीडिया में आने वाली खबरों से केजीएमयू के डैमेज कन्ट्रोल में जुटे प्रोफेसर साहब साम, दाम, दण्ड, भेद की राजनीति पर काम कर रहे हैं। पिछले साल होली मिलन के बहाने मीडिया में लिफाफा बांटने की एक खबर से उनको चर्चा में ला दिया था। कुछ फैकल्टी मेम्बर ने आरोप लगाया था कि सलाहकार ने कुछ मीडिया कर्मियों को शुभकामनाओं वाला एक बड़ा लिफाफा देकर यह गुजारिश की थी कि खबरों को सकारात्मक और संतुलित तरीके से प्रकाशित किया जाए। उनके इस कारनामें का काफी हद तक असर भी दिखा। मगर धर्मांतरण मामले ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया है।




