UP

हंगामें के बाद बढ़ायी गयी केजीएमयू की सुरक्षा

कार्रवाई न होने से शिक्षकों व कर्मचारियों में रोष

Lucknow: धर्मांतरण एवं यौन शोषण मामले में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के रेजीडेंट डॉक्टर की गिरफ्तारी के बाद भी माहौल शांत नहीं हैं। शुक्रवार को यहां हुए हंगामें के बाद स्थिति तनाव पूर्ण है। परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गयी है। वहीं वीसी ऑफिस में तोडफ़ोड़ करने वालों पर कार्रवाई न होने से शिक्षक व कर्मचारी संघ ने आंदोलन की चेतावनी दी है।

मालूम हो कि शुक्रवार को धर्मांतरण के मामले में राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव अपने समर्थकों के साथ पहुंचीं थीं। इस दौरान कुछ हिन्दू संगठन भी पहुंच गये थे। जिन्होंने केजीएमयू प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। आरोप है कि इस दौरान हंगामा कर रहे लोगों ने कुलपति कार्यालय में घुसकर तोडफ़ोड़ भी की। इससे दरवाजे की सिटकनी और कुलपति कार्यालय का सामान भी क्षतिग्रस्त हुआ। बताया जा रहा है कि हंगामे के दौरान कुलपति का सीयूजी नंबर वाला मोबाइल फोन भी गुम हो गया।

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केजीएमयू प्रशासन की ओर से प्रॉक्टर प्रो.आरएएस कुशवाहा ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए शुक्रवार को ही तहरीर दे दी, लेकिन पुलिस ने जांच की बात कहते हुए एफआईआर दर्ज नहीं की। इस वजह से केजीएमयू के शिक्षक, कर्मचारी और स्टूडेंट में आक्रोश है।

हंगामे के बाद केजीएमयू परिसर में कई जगहों पर पुलिस व पीएसी तैनात कर दी गयी है। वहीं केजीएमयू प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए चौक कोतवाली में लिखित तहरीर दी है। तहरीर में साफ कहा गया है कि विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह है मामला

केजीएमयू के पैथालॉजी विभाग में तैनात रेजीडेंट डॉ. रमीज मलिक पर महिला रेजीडेंट डॉक्टर ने शादी का झांसा देकर यौन शोषण और धर्मांतरण का आरोप लगाया था। आरोप था कि धर्मांतरण न करने पर रमीज ने शादी से इनकार कर दिया था। इससे त्रस्त होकर महिला डॉक्टर ने बीती 17 दिसम्बर को खुदकुशी की कोशिश की थी। पीडि़ता ने पुलिस व महिला आयोग में शिकायत की थी कि डॉ. रमीज ने शादी का झांसा देकर उसका कई महीने तक शोषण किया था। अपर्णा यादव ने केजीएमयू में महिला डॉक्टर के साथ यौन शोषण और धर्मांतरण मामले में कार्रवाई को लेकर केजीएमयू प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी डॉ. रमीज पर समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की गई और लगातार लापरवाही बरती गई। उन्होंने कुलपति सोनिया नित्यानंद को लेकर भी नाराजगी जताई। अपर्णा यादव ने कहा कि जब पीडि़ता ने महिला आयोग जाने की बात कही तो उसे मना कर दिया गया।

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