SGPGI: आईसीयू में ब्रेन डेड मरीजों के परिजनों को अंगदान के लिए प्रेरित करेंगे एनेस्थीसिया डॉक्टर

लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई (SGPGI) में अंगदान को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल शुरू हो रही है। अब एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टर आईसीयू में ब्रेन डेड (मस्तिष्क मृत्यु) मरीजों के परिजनों को अंगदान के लिए प्रेरित करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य जीवित अंगदाताओं पर निर्भरता को कम करना है। प्रदेश सरकार के निर्देश पर पीजीआई के डॉक्टर यूपी और अन्य राज्यों के मेडिकल कॉलेजों, एम्स और अन्य अस्पतालों में भी अंगदान कार्यक्रम शुरू करा रहे हैं।
परिजनों को मिलेगा संवेदनशील परामर्श
एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख डॉ. संजय धीराज और डॉ. संदीप साहू ने गुरुवार को प्रेसवार्ता में अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आईसीयू में डॉक्टरों को गंभीर मरीजों के ब्रेन डेड होने का अंदाजा हो जाता है। ऐसे में बेहोशी के डॉक्टर परिजनों को सही समय पर संवेदनशील जानकारी और परामर्श देंगे। इससे अंगदान की संभावनाएं काफी बढ़ जाएंगी। फिलहाल संस्थान में 90 प्रतिशत से ज्यादा अंग प्रत्यारोपण जीवित व्यक्तियों (Live Donors) से ही हो रहे हैं।
शनिवार को होगी पहली ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया मीट
प्रत्यारोपण एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. दिव्या श्रीवास्तव और डॉ. तापस सिंह ने बताया कि परिजनों की सहमति के बाद की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है। अंग निकालने से लेकर जरूरतमंद मरीज में प्रत्यारोपण और फिर आईसीयू में निगरानी का पूरा जिम्मा इन्हीं डॉक्टरों का होता है। डॉ. तापस ने बताया कि शनिवार को संस्थान में पहली ‘ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया मीट’ का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देशभर के करीब 50 विशेषज्ञ नए डॉक्टरों को अंगदान और प्रत्यारोपण का जरूरी प्रशिक्षण देंगे।
विभाग की क्षमता में हुआ इजाफा
एनेस्थीसिया विभाग में तीन नए डॉक्टरों— डॉ. तन्वी भार्गव, डॉ. वैशाली अग्रवाल और डॉ. तृप्ति सिंह के आने से क्षमता में काफी इजाफा हुआ है। अब विभाग एक ही दिन में कई ट्रांसप्लांट संभालने में पूरी तरह से सक्षम है।
देश में विशेषज्ञों की भारी कमी
डॉ. संदीप साहू ने बताया कि देश में अंग प्रत्यारोपण केंद्र तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया डॉक्टरों की भारी कमी है। पूरे देश में इस उच्च उपाधि की केवल छह सीटें उपलब्ध हैं। वहीं, पीजीआई में इस विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम की चार सीटें मौजूद हैं।
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