वायु प्रदूषण से घट रही बच्चों के फेफड़ों की कार्यक्षमता: डा. अजय वर्मा

Lucknow: वायु प्रदूषण के चलते अस्थमा तेजी से बढ़ रहा है। इसकी जद में अब बच्चे भी आ रहे हैं। अत्यधिक प्रदूषित शहरों में रहने वाले बच्चों में अस्थमा की दर 21.7 प्रतिशत थी, जबकि स्पाइरोमेट्री जांच में यह बढक़र 29.4 प्रतिशत पाई गई, अर्थात लगभग प्रत्येक तीन में से एक बच्चे में फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित मिली।
विश्व अस्थमा दिवस (World Asthma Day ) पर यह जानकारी डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS) मे आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में पल्मोनरी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. अजय कुमार वर्मा (Dr. Ajay Kumar Verma) ने दी। उन्होंने बताया कि अस्थमा अब केवल दवाओं और इनहेलर से नियंत्रित होने वाला रोग नहीं रह गया है, बल्कि यह तेजी से बिगड़ती पर्यावरणीय परिस्थितियों एवं प्रदूषित वायु से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
डॉ. वर्मा ने बताया कि भारत के कई शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक है।
उन्होंने लंग केयर फाउंडेशन द्वारा किए गए एक बहु-शहरी अध्ययन का उल्लेख करते हुए बताया कि अत्यधिक प्रदूषित शहरों में रहने वाले बच्चों में अस्थमा की व्यापकता चिंताजनक रूप से अधिक पाई गई। प्रत्येक तीन में से एक बच्चे में फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित मिली।डॉ. वर्मा ने बच्चों को सबसे अधिक संवेदनशील बताते हुए कहा कि बचपन तथा गर्भावस्था के दौरान प्रदूषित वायु के संपर्क में आने से फेफड़ों के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा भविष्य में श्वसन रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

उन्होंने यह भी बताया कि बड़ी संख्या में अस्थमा रोगी समय पर चिन्हित नहीं हो पाते, जिसका कारण जागरूकता की कमी, इनहेलर के प्रति सामाजिक भ्रांतियां तथा स्पाइरोमेट्री जैसी जांच सुविधाओं की सीमित उपलब्धता है। परिणामस्वरूप रोग की पहचान और उपचार में देरी होती है, जिससे रोग अधिक गंभीर रूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि इनहेलर अस्थमा नियंत्रण के लिए जरूरी है लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना होगा। उन्होंने योग एवं प्राणायाम को फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने, श्वसन क्रिया सुधारने, तनाव कम करने तथा जीवन गुणवत्ता बेहतर बनाने में अत्यंत लाभकारी बताया।
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रो. सी. एम. सिंह, (Dr. C,M. Singh) ने कहा कि अस्थमा से पीडि़त व्यक्ति को तो दवा के साथ प्राणायाम करना ही चाहिए लेकिन जो व्यक्ति स्वस्थ हैं, वह भी प्राणायाम करके इन बीमारियों से बच सकते हैं। इस दौरान हुए व्यावहारिक सत्र में डॉ. पुलकित गुप्ता एवं डॉ. शिवम वर्मा द्वारा अस्थमा रोगियों को श्वास सम्बन्धी व्यायाम, योग तकनीकों एवं श्वसन देखभाल संबंधी प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम में काफी संख्या में मरीजों, स्वास्थ्यकर्मियों, संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया। यह आयोजन योग, स्वच्छ वायु एवं स्वस्थ जीवनशैली के माध्यम से श्वसन स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की दिशा में एक सफल जन-जागरूकता पहल साबित हुआ।
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