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एसआईआर प्रक्रिया में नागरिकों और प्रशासन का सहयोग अनिवार्य: लखनऊ विश्वविद्यालय में कार्यशाला संपन्न

लखनऊ। अटल सुशासन पीठ, लोक प्रशासन विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा ‘एसआईआर (SIR): मुद्दे एवं चुनौतियाँ’ विषयक एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन डीपीए सभागार में किया गया। कार्यक्रम का आगाज़ पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

सुशासन और संवैधानिक पृष्ठभूमि पर चर्चा

विभागाध्यक्ष और अटल सुशासन पीठ के संयोजक प्रो. नंद लाल भारती ने पीठ की उपलब्धियों और कार्यशाला की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता, पूर्व कुलपति प्रो. बलराज चौहान ने एसआईआर की संवैधानिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ और तकनीकी प्रशिक्षण की कमी को एक बड़ी चुनौती बताते हुए, प्रक्रिया से गायब होते नामों पर चिंता व्यक्त की।

Prof Balraj Singh

चुनावी जागरूकता और जमीनी चुनौतियां

राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. संजय गुप्ता ने कहा कि एसआईआर के कारण जनता में चुनावी प्रक्रिया को लेकर जागरूकता बढ़ी है। हालांकि, उन्होंने जमीनी स्तर पर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) की कमी और निर्वाचन सूची में हो रही कटौती जैसे गंभीर मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान हेतु समयसीमा बढ़ाने और सरकार व चुनाव आयोग को उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों पर विचार करने का सुझाव दिया।

डिजिटल समाधान और समन्वय की आवश्यकता

वरिष्ठ पत्रकार हैदर रायानी ने अधिकारियों के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने 2003 की मतदाता सूची से मिलान में आने वाली दिक्कतों पर चर्चा करते हुए विभागों के बीच बेहतर तालमेल और एआई (Artificial Intelligence) के उपयोग पर जोर दिया।

बीएलओ की भूमिका और नागरिक भागीदारी

द्वितीय तकनीकी सत्र में डॉ. यू.बी. सिंह ने एसआईआर की नियमावली और विभिन्न चरणों को समझाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचन सूची की शुद्धता के लिए बीएलओ (BLO) की सक्रियता के साथ-साथ नागरिकों का प्रशासन के साथ सहयोग करना अनिवार्य है।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. एस.एस. चौहान ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर डॉ नंदिता कौशल, फैसल अंसारी, एकाँश अवस्थी, रंजीत चौहान, गजेंद्र कुमार, ऋचा यादव, स्वाति दास, कौशांबी, पयोध कांत, अणिमा शुक्ला, राजेश कुमार, समेत अन्य विद्यार्थी एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।

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Sunil Yadav

संपादक, और अनुभवी पत्रकार हैं। वे दैनिक जागरण, आईनेक्‍स्‍ट, कैनविज टाइम्‍स और दैनिक जागरण आईनेक्‍स्‍ट से जुड़े रहे हैं। वह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति, प्रशासनिक ख़बरों, स्वास्थ्य सेवाओं, टेक्‍नोलॉजी से जुड़े विषयों पर लिखते हैं। ट्विटर (X) पर उनसे @sunilyadav21 पर जुड़ सकते हैं।

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