बच्चों के कफ सिरप में मिलावट का खतरा: FSDA आयुक्त

कफ सिरप एवं लिक्विड ओरल दवाओं में डीईजी की जांच जरूरी
Lucknow: आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने निर्देश दिया कि तरल ओरल औषधियों के नमूनों में डाईइथाइल ग्लाइकॉल (DEG) मिलावट की नियमित जांच कराई जाए। अपमिश्रण पाए जाने पर दोषी फर्म के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा कार्रवाई करें। एफएसडीए आयुक्त रोशन जैकब का कहना है कि बच्चो के कफ सिरप में मिलावट का खतरा है। उन्होंने सलाह दी कि पांच साल से छोटे बच्चों को कफ सिरप देने में सावधानी बरतें।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त ने मंगलवार को जारी अपने पत्र में कहा कि पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए कफ सिरप का उपयोग अनुशंसित नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए एक एडवाइजरी (Advisory) जारी की है। सभी को उसका पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी दवा में मिलावट किसी भी रूप में स्वीकार नहीं की जा सकती। बच्चों के कफ सिरप में भी मिलावट का खतरा रहता है। पूर्व की हुई कुछ जांचों से यह पता चला कि डाईइथाइल ग्लाइकॉल की मिलावट के कारण कफ सिरप जानलेवा साबित हुए हैं। इसे रोकने के लिए टीमें नियमित निरीक्षण करें।

दवाओं के सैम्पल लेकर उन्हें परीक्षण के लिए लैब भेजें। फार्मास्यूटिकल यूनिट्स का नियमित निरीक्षण करते हुए दवा बनाने में प्रयोग होने वाले सहायक घटकों के नमूनों की भी जांच की जाए। तरल ओरल औषधियों में मिलावट की जांच के आदेश दिए गए हैं। औषधियों में मिलावट, छलपूर्वक या गलत नाम/पता से विनिर्माण या विक्रय करने पर भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत अपराध माना जाएगा। ऐसी स्थिति में एफआईआर भी दर्ज कराई जाए। FSDA आयुक्त ने सभी दवा दुकानदारों और दवा कम्पनियों को चेतावनी दी कि किसी भी औषधि में मिलावट न करें। मिलावटी दवा से मरीज खासकर बच्चों की जान को खतरा हो सकता है। यदि कोई दवा निर्माता या विक्रेता ऐसा करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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उन्होंने कहा कि दवाओं बिक्री के लिए नए नियम बनाए गए हैं। लोगों को इसके प्रति जागरुक करना होगा। उन्होंने दवा दुकानों के लिए निर्देश दिए कि कफ सिरप की बिक्री से पहले डाक्टर का पर्चा जरूर देखें। सलाह दी कि खांसी-बुखार जैसे सामान्य रोगों के लिए घर में रखी हुई पुरानी औषधियों का उपयोग न करें। उन्होंने कहा कि दवा लेते समय मेडिकल स्टोर से बिल जरूर मांगे। बिल पर बैच नंबर और एक्सपाइरी की डेट का मिलान दवा से अवश्य करें। आयुवक्त ने सभी औषधि निरीक्षकों को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 तथा नियमावलियों के प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। आयुक्त ने सभी ड्रग इंस्पेक्टर को निर्देशित किया कि जांच में किसी प्रकार की कोताही न बरती जाए। मरीज की जान से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जा सकता।

तीन दवा कंपनियों पर छापा मार सैम्पल लिए गए
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के सहायक आयुक्त औषधि बृजेश कुमार के नेतृत्व में तीन यूनिटों पर छापेमारी की गई। सरोजिनी नगर इंडस्ट्रियल एस्टेट में संचालित मेसर्स स्टडमेड प्राइवेट लिमिटेड, कृष्णा नगर की न्यूरोकैम लैबोरेट्रीज और लामी भवन ऐशबाग की आरपाइक प्राइवेट लिमिटेड पर छापा मारा गया है। विभागीय जांच टीम ने औषधियों के उत्पादन और भंडारण की स्थिति का निरीक्षण किया। जांच के दौरान पाया गया कि न्यूरोकैम लैबोरेट्रीज में कोल्डरिफ कफ सिरप का उत्पादन और भंडारण नहीं हो रहा है। कंपनी प्रबंधन ने बताया कि कई दिनों से उत्पादन बंद है। वहीं मेसर्स स्टडमेड प्राइवेट लिमिटेड से दो और आरपाइक प्राइवेट लिमिटेड से दो कोल्ड्रिफ सिरप के सैंपल लिए गए हैं। सभी सैम्पल जांच के लिए राजकीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं। अफसरों ने बताया कि यदि जांच में नमूने मानक से विपरीत पाए जाते हैं, तो संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।




