KGMU: कोर्ट ने पूछा सवाल तो केजीएमयू में गायब मिले भर्ती संबंधी रिकार्ड, FIR दर्ज

लखनऊ: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कर्मचारियों की भर्ती में धांधली के गंभीर आरोप लगे हैं। परीक्षा में कम नंबर लाने वाले अभ्यर्थियों को नौकरी बांट दी गई और ज्यादा नंबर वालों को बाहर का रास्ता दिखा गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की सख्ती के बाद केजीएमयू प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। कोर्ट ने जब भर्ती का फाइनल रिजल्ट तलब किया, तो पता चला कि यूनिवर्सिटी से इस पूरी भर्ती प्रक्रिया के रिकॉर्ड ही गायब हैं।
मामले में अपनी गर्दन फंसती देख केजीएमयू प्रशासन ने आनन-फानन में लखनऊ की चौक कोतवाली (Chowk Kotwali) में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करा दी है।
किंग जार्ज डेंटल यूनिवर्सिटी में हुई थी भर्ती
गौरतलब है कि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनविर्सिटी के दंत संकाय को 2004 में ‘किंग जॉर्ज डेंटल यूनिवर्सिटी’ बना दिया गया था। नई बनी ‘किंग जॉर्ज डेंटल यूनिवर्सिटी’ को चलाने के लिए गैर-शैक्षणिक (Non-teaching) कर्मचारियों की जरूरत थी। इसके लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने क्लर्क (Junior Assistant), स्टेनोग्राफर और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती का विज्ञापन निकाला था। परीक्षा और टाइपिंग टेस्ट के बाद जब परिणाम आया, तो बड़े पैमाने पर अभ्यर्थियों ने धांधली के आरोप लगाए। कुछ अभ्यर्थियों ने न्याय ना मिलने पर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी।
शिकायत किसने की ?
इसी दौरान 2006-2007 में पुन: डेंटल यूनिवर्सिटी को केजीएयमू के दंत संकाय के रूप में वापस मर्ज कर दिया गया। वर्ष 2005 से मामला हार्ट कोर्ट में लंबित है। वादी रूचि सिन्हा के केस की सुनवाई करते हुए 22 जुलाई 2026 के आदेश में जस्टिस इरशाद अली ने केजीएमयू रजिस्ट्रार को व्यक्तिगत रूप से भर्ती परीक्षा के फाइनल रिजल्ट के साथ 5 अगस्त 2026 को उपस्थित होने के आदेश दिए।
कोर्ट के आदेश मिलने के बाद केजीएमयू प्रशासन ने आनन फानन में इन भर्तियों के रिजल्ट संबंधित दस्तावेज ढूंढ़ने शुरू किए तो पता चला कि कर्मचारियों की भर्ती से संबंधित डाक्यूमेंट केजीएमयू से गायब हैं। केजीएमयू के रजिस्ट्रार आफिस और वीसी कार्यालय, डेंटल फैकल्टी और उस समय डेंटल यूनिवर्सिटी में कार्यरत सभी कर्मचारियों से पूछताछ की गई। लेकिन किसी के पास डाक्यूमेंट ना मिलने पर केजीएमयू प्रशासन ने अज्ञात लोगों के खिलाफ चौक कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई है।
याचिका कर्ता के गंभीर आरोप
याचिकाकर्ता का आरोप है कि भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला गया, लेकिन अभ्यर्थी से कम नंबर वालों का सेलेक्शन कर तैनाती दे दी गई और उन्हें बाहर कर दिया गया। केजीएमयू प्रशासन के लगातार टालमटाेल रवैय्ये के कारण हाई कोर्ट ने फाइनल मेरिट लिस्ट के साथ केजीएमयू रजिस्ट्रार को 5 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के आदेश दिए। जिसके बाद से केजीएमयू में हड़कंप मचा हुआ है।
वर्ष 2005 में लिपिक की भर्ती से संबंंधित मामला है, कुछ लोगों के भर्ती संबंधी रिकार्ड मांगे गए थे जो गायब हैं, इसलिए अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। मामला हाई कोर्ट में लंबित है।
प्रो. केके सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयू




