रायबरेली: श्रीमद्भागवत कथा में गूंजे श्रीकृष्ण के जयकारे, जन्मोत्सव का प्रसंग सुन झूम उठे श्रद्धालु

सतांव (रायबरेली)। विकास क्षेत्र के बरउवा गांव में इन दिनों श्रीमद्भागवत कथा की अमृत वर्षा हो रही है। रविवार को कथा वाचक आचार्य अभिषेकाचार्य महराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया। भगवान के जन्म से जुड़े भजनों और गीतों पर मौजूद श्रोता झूम उठे। पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया।
कंस के अत्याचार और आकाशवाणी का प्रसंग
आचार्य अभिषेकाचार्य ने द्वापर युग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि मथुरा में अत्याचारी राजा कंस का शासन था। उसने अपने ही पिता को बंदीगृह में डाल रखा था। कंस अपनी बहन देवकी से बहुत स्नेह करता था। विवाह के बाद जब वह देवकी और वसुदेव को रथ पर विदा करने जा रहा था, तभी आकाशवाणी हुई। आकाशवाणी में कहा गया- “कंस, देवकी का आठवां पुत्र ही तेरा वध करेगा।” इस चेतावनी से कंस घबरा गया। उसने देवकी और वसुदेव को कारागार में डाल दिया। इसके बाद उसने क्रूरता की हदें पार करते हुए उनके सात पुत्रों की हत्या कर दी।
कारागार में हुआ दिव्य प्रकाश
कथा वाचक ने आठवें पुत्र के जन्म का रोचक प्रसंग सुनाया। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि थी। आधी रात को घोर अंधकार और भारी वर्षा के बीच कारागार में दिव्य प्रकाश हुआ। भगवान विष्णु ने देवकी और वसुदेव को चतुर्भुज रूप में दर्शन दिए। उन्होंने कहा कि वह स्वयं उनके पुत्र के रूप में जन्म ले रहे हैं। इसके बाद वे बालक कृष्ण के रूप में प्रकट हो गए। चमत्कारिक रूप से वसुदेव की हथकड़ियां खुल गईं। पहरेदार गहरी नींद में सो गए और कारागार के दरवाजे खुद-ब-खुद खुल गए।

यमुना ने दिया मार्ग, शेषनाग ने की रक्षा
आकाशवाणी के निर्देशानुसार, वसुदेव बालक कृष्ण को टोकरी में लेकर गोकुल की ओर निकल पड़े। उफनती यमुना ने भगवान के चरणों का स्पर्श पाते ही मार्ग दे दिया। भारी बारिश के बीच शेषनाग ने अपने फन से बालक की रक्षा की। उसी रात गोकुल में नंद बाबा के घर माता यशोदा ने एक कन्या को जन्म दिया था। वसुदेव ने कृष्ण को वहां सुला दिया और उस कन्या को लेकर मथुरा लौट आए।
कंस ने जब उस कन्या को मारना चाहा, तो वह उसके हाथों से छूटकर आकाश में दुर्गा के रूप में प्रकट हुई। उसने कंस को चेतावनी दी- “तेरा वध करने वाला गोकुल में सुरक्षित है।” इसी दिव्य रात की याद में हर वर्ष जन्माष्टमी का पावन पर्व मनाया जाता है।
कार्यक्रम में इनकी रही मौजूदगी
इस धार्मिक आयोजन में विनोद सिंह, संजय सिंह, राजेन्द्र प्रताप सिंह, धर्मेन्द्र सिंह, ओम प्रकाश सिंह, पवन सिंह और समीर सिंह समेत भारी संख्या में लोग मौजूद रहे। साथ ही शिव कुमार सिंह, रणधीर सिंह, सुनील सिंह, अनिल कुमार, सौरभ सिंह, अमरेश, गौरव, राजेश बहादुर, अनुराग और गिरिजा शंकर सिंह आदि ने भी कथा का श्रवण किया।
ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं
WhatsApp Channel, Google News और सोशल मीडिया पर फॉलो करें



