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KGMU: लव जिहाद मामले में फरार चल रहा 50 हजार का इनामी डॉक्टर गिरफ्तार

LUCKNOW: धर्मांतरण Religious conversion) व लव जिहाद मामले में फरार चल रहे किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के आरोपी डॉक्टर रमीजउद्दीन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया गया। मुकदमा दर्ज होने से बाद से रमीज फरार था। पुलिस ने उस पर 50 हजार का इनाम भी घोषित कर रखा था।

पुलिस के अनुसार, आरोपी डॉक्टर हुसैनाबाद स्थित अपने फ्लैट से कुछ सामान निकालने आया था। इसी दौरान पहले से घात लगाए बैठी पुलिस टीम ने उसे फ्लैट के पास से ही दबोच लिया। बताया जा रहा है कि डॉक्टर रमीज कोर्ट में आत्मसमर्पण या हाजिर होने की फिराक में था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस रमीज के माता-पिता को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। इनके अलावा शारिक खान और सैय्यद जाहिद हसन के नाम भी इस मामले में सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की जांच जारी है।

आरोपी डॉक्टर केजीएमयू (KGMU) के पैथोलॉजी (Pathology) विभाग में रेजिडेंट डॉक्टर के तौर पर काम कर रहा था। इस दौरान उसने उसी विभाग की एक एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर को प्रेमजाल में फंसाया। शादी का झांसा देकर लंबे समय तक उसका यौन शोषण किया गया। जब शादी की बात गंभीर होने लगी तो आरोपी ने महिला डॉक्टर पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाना शुरू कर दिया। पीडि़ता के विरोध करने पर आरोपी ने उसे धमकियां दीं। मानसिक रूप से प्रताडि़त महिला डॉक्टर ने बीते 17 दिसम्बर को नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। हालत बिगडऩे पर उसे ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ।

हर स्तर पर दर्ज करायी शिकायत

घटना के बाद पीडि़ता ने केजीएमयू (KGMU) प्रशासन, स्थानीय पुलिस, मुख्यमंत्री के आईजीआरएस पोर्टल और राज्य महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई। मामला सामने आते ही प्रशासन और जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं और केजीएमयू स्तर पर भी जांच शुरू की गई। केजीएमयू (KGMU) की विशाखा कमेटी ने भी आरोपी डॉक्टर को दोषी मानते हुए उसका दाखिला रद्द कराने की बात कही। कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि आरोपी डॉक्टर रमीज का दाखिला रद्द किया जाएगा और वह आगे किसी भी तरह की पढ़ाई नहीं कर पाएगा। इसके लिए केजीएमयू (KGMU) प्रशासन की ओर से महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा (डीजीएमई) को पत्र भेजा जा रहा है।

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आरोपी डॉक्टर के मददगारों की तलाश

केजीएमयू (KGMU) में धर्मांतरण (Religious conversion) के प्रयास के आरोपी डॉक्टर को कथित रूप से बचाने या सहयोग करने वाले लोगों की भूमिका अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। जांच के दौरान दो प्रोफेसरों की भूमिका संदेह के घेरे में बताई जा रही थी, लेकिन इस पर केजीएमयू प्रशासन की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। न तो उन्हें क्लीनचिट दी गई है और न ही आरोपों की पुष्टि की गई है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब उसके मददगारों की भी तलाश तेज हो गयी है।

विशाखा कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट

मामले की जांच के लिए केजीएमयू में दो अलग-अलग समितियां गठित की गई थीं। यौन उत्पीडऩ के आरोपों की जांच विशाखा कमेटी द्वारा की गई। विशाखा कमेटी ने अपनी जांच पूरी कर गुरुवार को रिपोर्ट सौंप दी है। अब इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जायेगी। धर्मांतरण के आरोपों की जांच सात सदस्यीय कमेटी कर रही है, जिसमें एक सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक भी शामिल हैं।

 

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Mahima Tiwari

महिमा तिवारी, द कवरेज में सीनियर पत्रकार हैं। पत्रकारिता में 23 साल का अनुभव रखतीं हैं। वह राजनीति, हेल्थ, लाइफ स्‍टाइल और ह्यूमन एंगल स्टोरीज लिखती हैं। महिलाओं और बच्चों से संबंधित मुद्दों पर भी लिखना पसंद है।

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