मुठेर धाम में उमड़ा आस्था का सागर, दिव्य प्राकट्य से बना श्रद्धा का केंद्र

अश्विन नवमी पर हजारों श्रद्धालुओं की भीड़, 2004 की घटना ने बदल दी पहचान
सोनभद्र। जिला मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित मुठेर ग्राम इन दिनों आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां विराजमान ममतामयी मां के दरबार में साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन खासकर अश्विन नवमी के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, 27 सितंबर 2004 को अश्विन मास की कृष्ण पक्ष नवमी के दिन इस पावन स्थल पर माता जी का दिव्य प्राकट्य हुआ था। इस अद्भुत घटना के बाद से ही मुठेर ग्राम की पहचान तेजी से बढ़ी और यह स्थान लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र बन गया।
मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। यही कारण है कि दूर-दराज से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां पहुंचते हैं और मां के दर्शन कर आत्मिक शांति का अनुभव करते हैं।
मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भक्तों को एक विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति का एहसास होता है। अश्विन नवमी पर आयोजित विशेष पूजा-अर्चना और भव्य कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं और मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
मंदिर के मुख्य पुजारी के अनुसार, वर्षों से यहां कई ऐसे अनुभव सामने आए हैं, जिन्हें श्रद्धालु चमत्कार के रूप में मानते हैं। यही वजह है कि मुठेर धाम की महिमा दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
आस्था और विश्वास का यह अद्भुत संगम आज मुठेर ग्राम को एक विशिष्ट पहचान दिला चुका है, जहां हर श्रद्धालु सुकून, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा के साथ लौटता है।




