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रिश्तों में टकराव से बढ़ रही युवाओं में हिंसा व आत्महत्या

Lucknow: बीते कुछ सालों से युवाओं में हिंसा ( violence) व आत्महत्या (suicide) जैसे मानसिक विकार तेजी से बढ़ रहे रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि विश्व स्तर पर 10-19 वर्ष की आयु के हर 7 में से एक युवा किसी न किसी मानसिक विकार (Mental Disorder) से ग्रसित हैं। भारत में युवाओं में प्रतिवर्ष आत्महत्या की दर में लगभग 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह रिश्तों में टकराव है।

शनिवार को रिचमंड फेलोशिप सोसाइटी (इंडिया) की ओर से “मानसिक स्वास्थ्य, रिश्तों में टकराव और युवा” विषय पर आयोजित कार्यशाला में मानसिक रोग विशेषज्ञों ने इस पर गहन मंथन किया। डा. प्रभात सिठोले (Dr. Prabhat Sithole) ने बताया कि कैसे मानवीय रिश्ते मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्व रखते हैं और अनसुलझे टकराव अक्सर अलगाव, निम्न आत्मसम्मान, चिंता और अवसाद की ओर ले जाते हैं। रिश्तों में टकराव के कारण युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य अत्यधिक दबाव पड़ता है और यही सीधे तौर पर हिंसा एवं आत्महत्या की दर में तेजी से वृद्धि हुई हैं।

डा. सिठोले ने कहा कि पारस्परिक मनमुटाव, अस्थिर घरेलू वातावरण, सहपाठी दबाव और प्रेमिक संबंधों का टूटना अक्सर आत्मविश्वास की कमी के साथ अलगाव का कारण भी बनते है, जिससे चिंता विकार और अवसाद का खतरा दोगुना हो जाता है। परिणामस्वरूप भूख में कमी, नींद संबंधी विकार तथा शैक्षणिक प्रदर्शन में गिरावट देखी जाती है।

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डॉ. शशि राय (Dr. Shashi Rai) ने कहा कि आज के युवाओं में प्रेम संबंध से जुड़े मुद्दे, जैसे ब्रेकअप और ईष्या, अपराध व हिंसा के बढ़ते मामलों का कारण बन रहे हैं। रिश्तों में टकराव एक छिपा प्रेरक हैं। उन्होंने कि यह यह बहुत जरूरी है कि युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य और रिश्तों के टकराव के संदर्भ में समझाया जाए कि किस प्रकार उत्पन्न तनाव को रिश्तों के भीतर ही टकराव से पूर्व समाधान और तत्काल परामर्श के माध्यम से प्रारंभिक स्तर पर ही सक्रिय रूप से सुलझा लिया जाये। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्कूल व कॉलेज स्तर पर ही रिश्तों में टकराव को सुलझाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम, माइंडफुलनेस कार्यशालाएं, परिवार और सामुदायिक समर्थन कार्यक्रम किए जायें। इससे युवाओ में भावना के नियमन, तनाव प्रबंधन और संतुलित जीवनशैली के लिए आवश्यक कौशल विकसित किया जा सकता है।

इस मौके पर डॉ. एल. के. माहेश्वरी, मनोरोगी कल्याण संस्थान, बिट्स पिलानी के पूर्व कुलपति, ने भी अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। कार्यक्रम मेें मौजूद मुख्य अतिथि विधायक राजेश्वर सिंह (MLA Rajeshwar Singh) और विशिष्ट अतिथि श्री दिनेश दुआ द्वारा ने एक स्मारिका का विमोचन भी किया गया। राजेश्वर सिंह ने रिचमंड फेलोशिप सोसाइटी को 10 लाख रूपये का अनुदान भी दिया। कार्यशाला का संचालन डॉ. विवेक अग्रवाल तथा डॉ. नेहाश्री श्रीवास्तव द्वारा किया गया। इस दौरान नव उदय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया।

Mahima Tiwari

महिमा तिवारी, द कवरेज में सीनियर पत्रकार हैं। पत्रकारिता में 23 साल का अनुभव रखतीं हैं। वह राजनीति, हेल्थ, लाइफ स्‍टाइल और ह्यूमन एंगल स्टोरीज लिखती हैं। महिलाओं और बच्चों से संबंधित मुद्दों पर भी लिखना पसंद है।

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