भाजपा ने पवन सिंह चौहान को सौंपी शिक्षण संस्थान प्रकोष्ठ की कमान

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी ने सीतापुर से विधान परिषद सदस्य एवं एसआर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन पवन सिंह चौहान को एक और महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने उन्हें पार्टी के शिक्षण संस्थान प्रकोष्ठ का प्रदेश संयोजक नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के साथ ही पार्टी संगठन में उनकी भूमिका और व्यापक हो गई है। हाल ही में उन्हें भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया था।
भाजपा प्रदेश कार्यालय की ओर से जारी पदाधिकारियों की सूची में पवन सिंह चौहान के नाम की घोषणा की गई। पार्टी की ओर से उन्हें शिक्षण संस्थान प्रकोष्ठ की प्रदेश स्तरीय जिम्मेदारी सौंपे जाने को शिक्षा जगत से जुड़े संस्थानों और उनके प्रतिनिधियों के साथ संगठनात्मक समन्वय की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई जिम्मेदारी के तहत अब वे प्रदेशभर में शिक्षण संस्थानों से जुड़े लोगों के साथ संपर्क और संवाद स्थापित करने के साथ प्रकोष्ठ की गतिविधियों को आगे बढ़ाएंगे।
पवन सिंह चौहान शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह लखनऊ स्थित एसआर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन हैं। उनके नेतृत्व में संस्थान में तकनीकी, व्यावसायिक और उच्च शिक्षा से जुड़े विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। शिक्षा के साथ युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण और कौशल विकास से जोड़ना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। शैक्षणिक संस्थानों के संचालन और युवाओं से जुड़ी गतिविधियों का उन्हें लंबा अनुभव है।
राजनीतिक क्षेत्र में भी पवन सिंह चौहान की सक्रिय भूमिका रही है। वर्ष 2022 में वह सीतापुर स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य निर्वाचित हुए थे। इसके बाद से वह शिक्षा और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं। हाल ही में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किए जाने के बाद अब उन्हें शिक्षण संस्थान प्रकोष्ठ का प्रदेश संयोजक बनाया गया है।
भाजपा के शिक्षण संस्थान प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके सामने प्रदेश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, शिक्षाविदों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ संगठनात्मक तालमेल स्थापित करने की जिम्मेदारी होगी। इसके अलावा शिक्षा से संबंधित विषयों पर संवाद, संस्थानों से जुड़ी समस्याओं और सुझावों को संगठन तक पहुंचाने तथा प्रकोष्ठ की गतिविधियों को प्रदेश स्तर पर संचालित करने की भूमिका भी अहम रहेगी।
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