India Junk Food Crisis: Lancet की नई रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता, भारत में 40 गुना बढ़ी Ultra-Processed Food की बिक्री, Diabetes और Obesity का खतरा
India Junk Food Crisis: Lancet Study on Ultra-Processed Food Reveals 40-Fold Surge

नई दिल्ली: दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल The Lancet ने अपनी एक नई सीरीज़ में भारत में खान-पान की बिगड़ती आदतों को लेकर एक बेहद डराने वाली तस्वीर पेश की है। बुधवार को जारी इस रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि भारत में जंक फूड और Ultra-Processed Food (UPF) का बाजार खतरनाक तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक दशक से कुछ अधिक समय में भारत में ऐसे प्रोसेस्ड फूड की खुदरा बिक्री (Retail Sales) में 40 गुना (40-fold) की वृद्धि दर्ज की गई है।
लैंसेट की यह रिपोर्ट सीधे तौर पर चेतावनी देती है कि अगर इस ट्रेंड को नहीं रोका गया, तो भारत में Diabetes (मधुमेह) और Obesity (मोटापा) की महामारी और विकराल रूप ले लेगी।
2006 से 2019 के बीच आया भारी उछाल
लैंसेट की रिपोर्ट में पेश किए गए आंकड़े चौंकाने वाले हैं। आंकड़ों के अनुसार:
साल 2006 में भारत में Ultra-processed food का बाजार महज 0.9 बिलियन डॉलर का था।
साल 2019 तक यह आंकड़ा बढ़कर 38 बिलियन डॉलर (लगभग 3 लाख करोड़ रुपये) के करीब पहुंच गया।
यह डेटा साफ बताता है कि भारतीय घरों में पारंपरिक भोजन (Traditional Home-cooked meals) की जगह अब पैकेटबंद चिप्स, नूडल्स, कोल्ड ड्रिंक्स और रेडी-टू-ईट (Ready-to-eat) खानों ने ले ली है।
हर 4 में से 1 भारतीय मोटापे का शिकार
इस रिपोर्ट में जंक फूड की बिक्री और बीमारियों के बढ़ने के बीच सीधा संबंध (Direct Link) बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिस दौरान प्रोसेस्ड फूड की बिक्री बढ़ी, ठीक उसी दौरान भारत में वयस्कों (Adults) में मोटापे की दर दोगुनी हो गई।
- वर्तमान में हर 4 में से 1 भारतीय मोटापे (Obesity) से ग्रस्त है।
- हर 10 में से 1 भारतीय को डायबिटीज है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ये बीमारियां अब केवल जेनेटिक नहीं रहीं, बल्कि इनका प्रमुख कारण हमारी प्लेट में मौजूद यह ‘औद्योगिक भोजन’ (Industrial Food) है।
क्या है Ultra-Processed Food (UPF)?
आम लोगों को समझाने के लिए रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि सभी प्रोसेस्ड फूड बुरे नहीं होते, लेकिन Ultra-Processed Food (UPF) सबसे खतरनाक हैं। ये वो खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें घर की रसोई में नहीं बनाया जा सकता। इनमें:
बहुत ज्यादा चीनी, नमक और अनहेल्दी फैट होता है।
इनमें फाइबर (Resha) और जरूरी विटामिन्स न के बराबर होते हैं।
इन्हें स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें कॉस्मेटिक एडिटिव्स, आर्टिफिशियल फ्लेवर्स और कलर्स मिलाए जाते हैं।
उदाहरण: पैकेटबंद चिप्स, चॉकलेट, मीठे सीरियल्स (Breakfast Cereals), फिजी ड्रिंक्स (Soda), फ्रोज़न पिज्जा और इंस्टेंट नूडल्स।
“यह भूकंप जैसा खतरा (Seismic Threat) है”
रिपोर्ट के सह-लेखक (Co-author) और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण गुप्ता ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा, “भारत ठीक उसी बदलाव (Shift) से गुजर रहा है, जिसके बारे में लैंसेट ने चेतावनी दी है। आक्रामक मार्केटिंग और विज्ञापनों के जरिए हमारे पारंपरिक भोजन को ‘Hyper-palatable’ (बहुत ज्यादा स्वादिष्ट लगने वाले) UPF उत्पादों से बदला जा रहा है।”
डॉक्टर्स का कहना है कि ये फूड प्रोडक्ट्स इस तरह से डिजाइन किए जाते हैं कि लोग इनके आदी हो जाएं, जिससे Overconsumption (जरूरत से ज्यादा खाना) की समस्या पैदा होती है।
सिर्फ खुद पर नियंत्रण काफी नहीं, कड़े कानून की जरूरत
लैंसेट की इस रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें बीमारियों के लिए केवल ‘इच्छाशक्ति’ या ‘व्यक्तिगत व्यवहार’ को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। रिपोर्ट साफ कहती है कि जंक फूड कंपनियां मुनाफे के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रही हैं।
विशेषज्ञों ने भारत सरकार से तत्काल कड़े कदम उठाने की अपील की है:
Warning Labels: पैकेट के सामने (Front-of-pack) स्पष्ट चेतावनी लिखी होनी चाहिए कि इसमें कितना नमक या चीनी है।
Marketing Ban: बच्चों को टारगेट करने वाले जंक फूड के विज्ञापनों पर रोक लगनी चाहिए।
Taxes: ऐसे हानिकारक उत्पादों पर टैक्स बढ़ाया जाना चाहिए ताकि ये ताजे भोजन (Fresh Food) से सस्ते न मिलें।
रिपोर्ट के अंत में कहा गया है कि अगर भारत ने UPF को एक ‘प्राथमिकता वाला स्वास्थ्य मुद्दा’ (Priority Health Issue) नहीं माना, तो आने वाले सालों में हार्ट डिजीज, कैंसर और डायबिटीज का बोझ देश के हेल्थ सिस्टम को पूरी तरह चरमरा देगा।




