Lucknow: विद्युत अधिनियम-2003 बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारियों की रक्षा के लिए बना है। ऊर्जा मंत्रालय ने जो इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 तैयार किया है उसमें विद्युत अधिनियम की धारा 47(5) में संशोधन का कोई प्रस्ताव नहीं है। यह धारा उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर का विकल्प चुनने का अधिकार देती है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि विद्युत उपभोक्ताओं पर जबरन स्मार्ट प्रीपेड मीटर थोपना असंवैधानिक है। ऐसा करना उपभोक्ताओं के मौलिक अधिकारों और विद्युत अधिनियम 2003 का उल्लंघन है।
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अवधेश वर्मा ने कहा कि उपभोक्ताओं को संवैधानिक अधिकार प्राप्त है कि वे स्वयं तय करें कि उन्हें प्रीपेड मीटर लगवाना है या पोस्टपेड रखना है। इसको कोई विभागीय आदेश या शासनादेश से बदला नहीं जा सकता है। वर्मा ने कहा कि बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं की सहमति के बिना स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगा रही हैं, जो उपभोक्ता अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। बताया कि उत्तर प्रदेश में अब तक लगभग 43,44,703 स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से लगभग 20,69,740 मीटरों को उपभोक्ताओं की सहमति के बिना प्रीपेड मोड में बदल दिया गया है।
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उन्होंने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं की सिक्योरिटी मनी को उनकी जानकारी या अनुमति के बिना प्रीपेड वॉलेट में ट्रांसफर कर दिया गया है, जो पारदर्शिता पर प्रश्न खड़ा करता है। हकीकत यह है कि वर्तमान 85′ प्रीपेड मीटर निगेटिव बैलेंस में हैं, जिससे पता चलता है कि यह व्यवस्था उपभोक्ता हित में नहीं है।
नियामक आयोग की निष्क्रियता पर नाराजगी
वर्मा ने कहा कि राज्य की संवैधानिक संस्था उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) इस मामले में मौन है, जबकि उसका प्रमुख दायित्व उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने बताया कि परिषद द्वारा सभी दस्तावेजों और प्रमाणों के साथ आयोग को अवगत कराया जा चुका है, परंतु अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। नियामक आयोग की यह निष्क्रियता जनता के विश्वास और संविधान दोनों के लिए गलत है।
चेक मीटर घोटाले की जांच की मांग
बिजली कंपनियों ने मीटरों की विश्वसनीयता पता करने के लिए करीब दो लाख चेक मीटर लगाने का दावा किया था। मगर उनकी रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई। अब इन मीटरों को चुपचाप हटाया जा रहा है, जिससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि उपभोक्ताओं की शिकायतें सही हैं। यानि मीटर तेज चल रहे हैं और बिलिंग प्रणाली अपारदर्शी है। वर्मा ने रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुनने का अधिकार दिया जाए।
बिना सहमति लगाए गए स्मार्ट प्रीपेड मीटर तत्काल हटाए जाएं। विद्युत नियामक आयोग उपभोक्ता हित में तत्काल हस्तक्षेप करे।
