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SGPGI: 1.2 लीटर गाढ़ा मवाद, पूरी तरह पिचका फेफड़ा, डॉक्‍टर्स ने VATS सर्जरी की सहायता से मरीज को दी नई जिंदगी

सड़क हादसे के बाद बिगड़ी हालत, सीने में जमा हो गया भारी मात्रा में गाढ़ा मवाद, सिंगल-लंग वेंटिलेशन के बीच हुई हाई-रिस्क सर्जरी

लखनऊ: संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS) के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने एक जटिल मामले में 50 वर्षीय मरीज का मिनिमली इनवेसिव वैट्स (VATS) तकनीक से सफल ऑपरेशन कर नई जिंदगी दी है। मरीज के सीने में गंभीर संक्रमण के चलते 1.2 लीटर गाढ़ा मवाद भर गया था और उसका एक फेफड़ा पूरी तरह पिचक (Collapse) गया था। मरीज को सोमवार को संतोषजनक हालत में छुट्टी दे दी गई।

सोनभद्र निवासी श्री मेवालाल किसान हैं और मेडिकल स्टोर भी चलाते हैं। 8 अप्रैल 2026 को एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। स्थानीय जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बावजूद उनकी सांस की तकलीफ लगातार बढ़ती गई, जिसके बाद उन्हें गंभीर हालत में पीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर लाया गया।

केस अत्‍यधिक जटिल था, मरीज पहले से ही हाई ब्‍लड प्रेशर, डायबिटीज और हार्ट की बीमारी से पीड़ित था। मरीज की 2023 में एंजियोप्लास्टी (PTCA) भी हो चुकी थी। जांच में पता चला कि सीने में गंभीर पायोथोरेक्‍स हो गया है। फेफड़े के ऊपर फाइब्रस प्लूरल पील की एक सख्त और मोटी परत जम चुकी थी, जिससे फेफड़ा फैलने में पूरी तरह असमर्थ था। यह मामला बेहद उच्च जोखिम (हाई-रिस्क) वाला था।

स्थिति इतनी गंभीर थी कि सर्जरी के दौरान मरीज को सिंगल-लंग वेंटिलेशन पर रखा गया। सर्जिकल टीम ने वीडियो-असिस्टेड थोरैकोस्कोपिक सर्जरी (VATS) के जरिए सीने से करीब 1,200 मिलीलीटर गाढ़ा मवाद सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद डिकॉर्टिकेशन तकनीक से फेफड़े को जकड़ने वाली कठोर झिल्ली को हटाया गया, जिससे पिचका हुआ फेफड़ा दोबारा सामान्य रूप से फैलने लगा।

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ऑपरेशन के बाद मरीज को 2 दिन आईसीयू में निगरानी में रखने के बाद वार्ड में शिफ्ट किया गया। स्वास्थ्य में लगातार सुधार होने पर उन्हें 14 सितंबर को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

यह जटिल सर्जरी व इलाज एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के एडिशनल चीफ डॉ. अमित कुमार सिंह के नेतृत्व में ट्रॉमा सर्जरी के सीनियर रेजिडेंट्स डॉ. आदित्य सिंह और डॉ. वरुण गुप्ता द्वारा की गई। एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर मैनेजमेंट डॉ. गणपत और डॉ. रफात शमीम ने संभाला, जिसमें ओटी और आईसीयू टीम का भी अहम योगदान रहा।

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एसजीपीजीआई (SGPGI) के निदेशक ने ट्रॉमा सर्जरी, एनेस्थीसिया और नर्सिंग टीम के इस समन्वित प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि एक ही छत के नीचे उपलब्ध मल्टीडिसिप्लिनरी ट्रॉमा केयर और उन्नत क्रिटिकल केयर सुविधाओं के दम पर ही ऐसे अत्यधिक जटिल मामलों में मरीजों की जान बचाना संभव हो रहा है।

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Sunil Yadav

संपादक, और अनुभवी पत्रकार हैं। वे दैनिक जागरण, आईनेक्‍स्‍ट, कैनविज टाइम्‍स और दैनिक जागरण आईनेक्‍स्‍ट से जुड़े रहे हैं। वह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति, प्रशासनिक ख़बरों, स्वास्थ्य सेवाओं, टेक्‍नोलॉजी से जुड़े विषयों पर लिखते हैं। ट्विटर (X) पर उनसे @sunilyadav21 पर जुड़ सकते हैं।

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