10 किलो की बच्ची के पेट से निकाला गया 1.5 किलो का ट्यूमर, KGMU के डॉक्टरों को मिली बड़ी सफलता

लखनऊ: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के डॉक्टरों ने एक बड़ी मेडिकल सफलता हासिल की है। बाल शल्य चिकित्सा (Pediatric Surgery) विभाग ने 2 साल की एक बच्ची के पेट से 1.5 किलो का ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाला है। हैरान करने वाली बात यह है कि सर्जरी से पहले बच्ची का कुल वजन महज 10 किलो था।
दो महीने से पेट दर्द से तड़प रही थी बच्ची
बस्ती जिले के मुंडेरवा (ग्राम काबरा) के रहने वाले शिवम की 2 वर्षीय बेटी अंशिका को पिछले दो महीने से पेट में दर्द की शिकायत थी। यह दर्द समय के साथ लगातार बढ़ रहा था। बच्ची की भूख काफी कम हो गई थी। उसे लगातार उल्टियां भी हो रही थीं। माता-पिता ने पहले स्थानीय डॉक्टरों से इलाज कराया, लेकिन कोई आराम नहीं मिला। इसके बाद बच्ची को सीधे KGMU रेफर कर दिया गया।
CT Scan में दिखा दुर्लभ Lipoblastoma Tumor
KGMU में प्रो. आनंद पांडे ने मरीज की शुरुआती जांच की। गहराई से पड़ताल के लिए पेट का सीटी स्कैन (CT Scan) कराया गया। स्कैन रिपोर्ट में पेट के अंदर एक बहुत बड़ा ट्यूमर दिखाई दिया। डॉक्टरों ने इसे ‘लिपोब्लास्टोमा’ (Lipoblastoma) बताया। यह एक बेहद दुर्लभ ट्यूमर (rare tumor) है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विभाग के प्रमुख प्रो. जीडी रावत ने परिजनों को सर्जरी की आवश्यकता समझाई। जिसके बाद बच्ची को 27 अप्रैल 2026 को वार्ड में भर्ती कर लिया गया।
कई महत्वपूर्ण अंगों को दबा रहा था ट्यूमर
बच्ची का ऑपरेशन प्रो. जिलेदार रावत की देखरेख में किया गया। इस जटिल सर्जरी को प्रो.आनंद पांडे, डॉ. राहुल राय, डॉ. कौशल कुलकर्णी और डॉ. कृति पटेल की टीम ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस दौरान एनेस्थीसिया (Anesthesia) टीम का नेतृत्व प्रोफेसर सतीश वर्मा ने किया। यह 1.5 किलोग्राम का भारी ट्यूमर बच्ची की आंतों, दाहिने गुर्दे (Right Kidney) और अन्य जरूरी संरचनाओं को बुरी तरह दबा रहा था। डॉक्टरों ने बेहद सावधानी से इस ट्यूमर को शरीर से बाहर निकाल लिया।
बच्ची स्वस्थ, अस्पताल से हुई डिस्चार्ज
प्रो. जीडी रावत ने बताया कि लिपोब्लास्टोमा (Lipoblastoma) बचपन में होने वाला एक दुर्लभ ट्यूमर है। यह पेट के अलावा हाथों और पैरों में भी हो सकता है। सही समय पर सावधानीपूर्वक सर्जरी के जरिए ही इसका स्थायी इलाज किया जा सकता है। ऑपरेशन के बाद मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है। बच्ची को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। KGMU की कुलपति (VC) प्रो. सोनिया नित्यानंद ने इस सफल प्रयास और बच्ची को नई जिंदगी देने के लिए पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग को बधाई दी है।
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