पंकज प्रसून के व्यंग्यों पर सिमरन ने किया शोधकार्य

लखनऊ: डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ के “हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषा विभाग” में शहर के चर्चित व्यंग्यकार पंकज प्रसून (Pankaj Prasun) के साहित्य पर शोधकार्य संपन्न हुआ है।
विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर अखिलेश कुमार के निर्देशन में शोधार्थी कुमारी सिमरन ने “पंकज प्रसून के काव्य में चित्रित व्यंग्य का स्वरूप” विषय पर लघु शोध प्रबंध तैयार किया है।
विभागाध्यक्ष प्रो. यशवंत वीरोदय ने बताया कि पंकज प्रसून की व्यंग्य कविताएँ केवल हास्य और कटाक्ष तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनमें गहरे सामाजिक सरोकार, जनचेतना और व्यवस्था परिवर्तन की संवेदना भी निहित है। उनके व्यंग्य समाज की विसंगतियों को बेबाकी से उजागर करते हैं, साथ ही सुधार और सकारात्मक परिवर्तन का संदेश भी देते हैं।
उन्होंने कहा कि समकालीन हिंदी व्यंग्य में पंकज प्रसून ने अपनी विशिष्ट शैली, सहज भाषा और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से एक अलग पहचान बनाई है, जिसके कारण उनका साहित्य शोध का विषय बन रहा है।
पंकज प्रसून के बारे में
पंकज प्रसून भारत के हिंदी साहित्य के एक चर्चित हिंदी कवि, व्यंग्यकार, हास्यकार, लेखक और विज्ञान संचारक हैं। पंकज प्रसून अपनी अनूठी शैली और हास्यप्रद हिंदी कविताओं के लिए जाने जाते हैं और मुख्य रूप से लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं। वे जटिल वैज्ञानिक और तकनीकी विषयों को हास्य और व्यंग्य के साथ पिरोकर आम जनमानस तक पहुंचाते हैं।

उनकी कविताएं और रचनाएं केवल पाठकों को गुदगुदाती ही नहीं हैं, बल्कि समाज की विसंगतियों, राजनीतिक व्यवस्था और कुरीतियों पर गहरी चोट भी करती हैं। विज्ञान कविता (सांइस पोएट्री) के क्षेत्र में उनके विशेष योगदान को देशभर में काफी सराहा गया है। अपनी इसी सहज भाषा, जनचेतना और प्रभावशाली प्रस्तुति के कारण आज उनका साहित्य अकादमिक शोध का एक प्रमुख विषय बन चुका है।
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