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यूपी में बढ़ रहा Electric Vehicles का क्रेज: EV Subsidy Scheme के आवेदनों में लखनऊ नंबर वन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) का चलन तेजी से बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लागू ‘ईवी विनिर्माण एवं मोबिलिटी प्रोत्साहन नीति-2022’ (EV Policy 2022) का असर अब जमीन पर साफ दिख रहा है।

परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, ईवी क्रय सब्सिडी योजना के तहत इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों में राजधानी लखनऊ सबसे आगे है। वहीं, नोएडा, आगरा और गाजियाबाद जैसे शहर भी शीर्ष स्थानों पर बने हुए हैं।

इन शहरों से आए सबसे ज्यादा आवेदन

सब्सिडी योजना का लाभ लेने के लिए सबसे ज्यादा 12,520 आवेदन लखनऊ ट्रांसपोर्ट नगर आरटीओ से मिले हैं। इसके बाद अन्य बड़े शहरों का नंबर आता है:

  • आगरा: 10,752
  • नोएडा (गौतमबुद्ध नगर): 6,088
  • गाजियाबाद: 5,556
  • वाराणसी: 4,059
  • कानपुर नगर: 3,895

छोटे जिलों में भी ईवी की डिमांड

इलेक्ट्रिक वाहनों का क्रेज सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। प्रदेश के छोटे जिलों में भी लोग ई-वाहन अपना रहे हैं। मऊ में ईवी सब्सिडी के 817 आवेदन आए हैं। इसके अलावा गाजीपुर (750), कुशीनगर (547), उन्नाव (387) और सिद्धार्थनगर (74) जैसे जिलों में भी ईवी को लेकर लोगों का भरोसा बढ़ रहा है।

सरकार दे रही 20 लाख रुपये तक की छूट

इस योजना से वाहन खरीदारों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है। सरकार रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क (Registration Fee) में 100 प्रतिशत की छूट दे रही है।

  • दोपहिया वाहन: 5 हजार रुपये तक की सब्सिडी। स्मार्ट कार्ड आरसी और एचएसआरपी (HSRP) नंबर प्लेट की फीस में राहत से कुल 18 हजार रुपये तक की बचत।
  • चार पहिया वाहन: 1 लाख रुपये तक की छूट।
  • गैर-सरकारी ई-बस: 20 लाख रुपये तक की भारी सब्सिडी।

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि लोग इस योजना का बढ़-चढ़कर लाभ ले रहे हैं। इससे शून्य उत्सर्जन (Zero Emission) के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।

पर्यावरण और इकॉनमी दोनों को फायदा

इलेक्ट्रिक वाहन पेट्रोल-डीजल की तुलना में काफी किफायती साबित हो रहे हैं। इनकी प्रति किलोमीटर रनिंग कॉस्ट (Running Cost) बेहद कम है। इससे रोजाना सफर करने वालों के हजारों रुपये बच रहे हैं।

इसके साथ ही, ईवी के इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन में कमी आ रही है। सरकार का लक्ष्य हरित परिवहन (Green Transport) व्यवस्था को मजबूत करना है। परिवहन विभाग का अनुमान है कि यदि 2030 तक देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 20% तक पहुंचती है, तो कच्चे तेल के आयात बिल में भारी कमी आएगी।

Sunil Yadav

संपादक, लेखक और अनुभवी पत्रकार हैं। वे दैनिक जागरण, आईनेक्‍स्‍ट, कैनविज टाइम्‍स और दैनिक जागरण आईनेक्‍स्‍ट से जुड़े रहे हैं। वह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति, प्रशासनिक ख़बरों, स्वास्थ्य सेवाओं, टेक्‍नोलॉजी से जुड़े विषयों पर लिखते हैं। ट्विटर (X) पर उनसे @sunilyadav21 पर जुड़ सकते हैं।

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