SGPGI Lucknow: 1% ब्रेन डेड मरीजों के अंगदान से मिल सकता है 640 लोगों को नया जीवन, डिप्टी सीएम ने अंगदाताओं को किया सम्मानित

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में हर साल सड़क हादसों में करीब 24 हजार लोगों की मौत हो जाती है। इनमें बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। अगर इनमें से केवल एक फीसदी (1%) ब्रेन डेड मरीजों के अंगों का सफल प्रत्यारोपण हो सके, तो सैकड़ों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। सिर्फ इस एक फीसदी अंगदान से 400 गुर्दा (Kidney), 240 लिवर (Liver) और हृदय (Heart) रोगियों को नया जीवन मिल सकता है। इसके अलावा फेफड़े, पैंक्रियाज, आंखें, हड्डियां और त्वचा भी जरूरतमंदों को दान की जा सकती हैं।
यह अहम जानकारी SGPGI के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. नारायण प्रसाद ने दी। वह शनिवार को विभाग के 39वें स्थापना दिवस के मौके पर बोल रहे थे। इस दौरान ‘मृत अंगदाता प्रत्यारोपण की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाएं’ विषय पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया था।
हर साल 50 हजार मरीजों को किडनी की जरूरत
डॉ. नारायण प्रसाद ने बताया कि देश में हर साल करीब 50 हजार मरीजों को किडनी प्रत्यारोपण (Kidney Transplant) की जरूरत पड़ती है। लेकिन, पूरे प्रदेश में केवल 500 से 700 प्रत्यारोपण ही हो पा रहे हैं। इस अंतर को पाटने के लिए अंगदान के प्रति जागरूकता बेहद जरूरी है।
समारोह में बीएचयू (BHU) के निदेशक डॉ. एसएन शंखवार ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने PGI में एक आधुनिक गुर्दा केंद्र (Modern Kidney Center) स्थापित करने का अहम सुझाव दिया।
आपको बता दें कि SGPGI के नेफ्रोलॉजी विभाग की स्थापना 15 मई 1987 को पहले विभागाध्यक्ष डॉ. विजय खेर, डॉ. आरके शर्मा और डॉ. अमित गुप्ता ने की थी।
SGPGI को मिल सकता है वन विभाग का गेस्ट हाउस
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कई बड़ी घोषणाएं कीं। उन्होंने आश्वासन दिया कि वन विभाग का गेस्ट हाउस PGI को देने के लिए वह जल्द ही वन मंत्री से बात करेंगे। अगर ऐसा होता है, तो इलाज के लिए दूसरे राज्यों से आने वाले मरीजों, उनके तीमारदारों और मेडिकल छात्रों को ठहरने की बेहतर सुविधा मिलेगी।
डिप्टी सीएम ने PGI परिसर में 10 से 20 कमरे और करीब 200 लोगों के बैठने की क्षमता वाला एक हॉल बनवाने का भी सुझाव दिया।
KGMU और SGPGI मिलकर करेंगे काम
ऑर्गन डोनेशन (Organ Donation) को रफ्तार देने के लिए दोनों बड़े संस्थानों में समन्वय बनाया जाएगा। डिप्टी सीएम ने बताया कि अब केजीएमयू (KGMU) ट्रॉमा सेंटर के अधिकारी सड़क हादसों में होने वाले ब्रेन डेड मरीजों की सूचना सीधे PGI को देंगे। इससे PGI की टीम समय रहते ब्रेन डेड मरीजों के परिजनों से मिलकर उन्हें अंगदान के लिए प्रेरित कर सकेगी।
संगोष्ठी में अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष, SGPGI के निदेशक प्रो. आरके धीमन और यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. एमएस अंसारी भी मौजूद रहे। वहीं, अहमदाबाद के IKDRC से आए डॉ. विवेक कुटे ने गुजरात के सफल ऑर्गन ट्रांसप्लांट मॉडल के अनुभव साझा किए। उन्होंने इस सफल मॉडल को उत्तर प्रदेश में भी लागू करने की सलाह दी।
इन हस्तियों का हुआ सम्मान
स्थापना दिवस समारोह के दौरान कई डॉक्टरों और अंगदाताओं के परिजनों को सम्मानित किया गया:
- डॉ. विजय खेर को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ (Lifetime Achievement Award) से नवाजा गया।
- गुर्दा दान करने वाले दो ब्रेन डेड मरीजों के परिजनों को मंच पर सम्मानित किया गया।
- इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी के सचिव डॉ. श्याम बंसल को ‘विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार’ दिया गया।
- इसके अलावा डॉ. एन. गोपालकृष्णन, ललिता रघुरामन, डॉ. विवेक कुटे और डॉ. अरविंद गुप्ता को भी सम्मानित किया गया।
- रेजिडेंट डॉक्टरों में डॉ. यशेंदु सारडा, डॉ. सौर्य सौरभ मोहकुडा, डॉ. आकाश राय और डॉ. कृतिका गुप्ता को सम्मान मिला।
- ‘ब्रिजिंग द बॉन्ड’ (Bridging the Bond) का विशेष पुरस्कार संतोष वर्मा को प्रदान किया गया।




