स्प्रिंगर नेचर ने ‘वायरसडीज़ीज़’ जर्नल को किया सम्मानित, UN के सतत विकास लक्ष्यों में दिया बड़ा योगदान

लखनऊ: अंतरराष्ट्रीय पीयर-रिव्यूड जर्नल ‘वायरसडीज़ीज़’ (VirusDisease) ने एक बड़ी वैश्विक उपलब्धि हासिल की है। इस प्रतिष्ठित जर्नल को स्प्रिंगर नेचर (Springer Nature) द्वारा ‘एसडीजी प्रोग्राम बैज’ (SDGs) से सम्मानित किया गया है।
यह सम्मान वर्ष 2025 में संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (UN SDGs) में जर्नल के महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए दिया गया है।
50% से अधिक लेख SDG से जुड़े
स्प्रिंगर नेचर एसडीजी प्रोग्राम की निदेशक डॉ. निकोला जोन्स ने इस उपलब्धि की आधिकारिक पुष्टि की है। उन्होंने ‘वायरसडीज़ीज़’ के प्रधान संपादक प्रो. शैलेंद्र सक्सेना को एक पत्र भेजा है।
पत्र में बताया गया है कि 2025 के दौरान जर्नल में प्रकाशित 50% से अधिक लेख सीधे तौर पर 17 संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (UN Sustainable Development Goals) में से एक या अधिक से जुड़े थे। डॉ. जोन्स ने लिखा कि एसडीजी को आगे बढ़ाने में जर्नल का योगदान पूरी तरह से मान्यता के योग्य है।
वेबसाइट पर प्रदर्शित हुआ SDG बैज
इस बड़ी उपलब्धि के बाद ‘वायरसडीज़ीज़’ की वेबसाइट को अपडेट किया गया है। अब वेबसाइट पर आधिकारिक स्प्रिंगर नेचर एसडीजी प्रोग्राम बैज प्रदर्शित किया जा रहा है। साथ ही यह गर्व के साथ लिखा गया है कि 2025 में प्रकाशित आधे से अधिक शोध पत्र सीधे तौर पर वैश्विक चुनौतियों के समाधान से जुड़े थे।

वायरसडीज़ीज़ (VirusDisease) जर्नल मानव, पशु, पौधों और पर्यावरण में पाए जाने वाले विषाणुओं पर अहम शोध प्रकाशित करता है।
वायरसडीज़ीज़ (VirusDisease) मानव, पशु, पौधों और पर्यावरणीय विषाणुओं पर शोध प्रकाशित करता है। 2025 के इसके अधिकांश प्रकाशन एसडीजी 3: अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़े थे, साथ ही एसडीजी 6: स्वच्छ जल और स्वच्छता, एसडीजी 9: उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढांचा, और एसडीजी 17: लक्ष्यों के लिए साझेदारी को भी संबोधित करते थे।
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, (KGMU) लखनऊ में कार्यरत प्रो. शैलेंद्र सक्सेना ने कहा कि यह सम्मान जर्नल की संपादकीय दृष्टि को दर्शाता है। “हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना रहा है कि विषाणु विज्ञान अनुसंधान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे। इसे नीति को सूचित करना चाहिए, डायग्नोस्टिक्स में सुधार करना चाहिए और अंततः सार्वजनिक स्वास्थ्य की सेवा करनी चाहिए। यह बैज हमारे लेखकों, समीक्षकों और संपादकीय मंडल का है जिन्होंने वैज्ञानिक कठोरता के साथ सामाजिक प्रासंगिकता को बनाए रखा।”
स्प्रिंगर नेचर एसडीजी प्रोग्राम के बारे में
एसडीजी प्रोग्राम उन शैक्षणिक सामग्री की पहचान करता है और उसे बढ़ावा देता है जो संयुक्त राष्ट्र के 2030 एजेंडा को आगे बढ़ाती है। एसडीजी से जुड़ी सामग्री की सीमा पूरी करने वाले जर्नल्स को एसडीजी बैज के माध्यम से सार्वजनिक मान्यता मिलती है और उन्हें स्प्रिंगर नेचर के प्लेटफॉर्म पर हाइलाइट किया जाता है।
वायरसडीज़ीज़ के बारे में
वायरसडीज़ीज़ (VirusDisease) इंडियन वायरोलॉजिकल सोसाइटी का आधिकारिक प्रकाशन है और इसे स्प्रिंगर नेचर (Springer Nature) द्वारा प्रकाशित किया जाता है। इसमें विषाणु विज्ञान के सभी पहलुओं पर मौलिक शोध, समीक्षा लेख और केस रिपोर्ट प्रकाशित होती हैं।
इस उपलब्धि पर प्रो. सक्सेना ने कहा कि यह सम्मान जर्नल की संपादकीय दृष्टि का परिणाम है। उनका मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि विषाणु विज्ञान (Virology) का शोध सिर्फ प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे। इसका उपयोग स्वास्थ्य नीतियों को बेहतर बनाने, डायग्नोस्टिक्स सुधारने और जनस्वास्थ्य की सेवा में होना चाहिए। उन्होंने इस सफलता का श्रेय लेखकों, समीक्षकों और पूरे संपादकीय मंडल को दिया है।




