आईएमए ने आयोजित किया मेडिकल एजुकेशन कार्यक्रम, आधुनिक चिकित्सा तकनीकों पर विशेषज्ञों ने साझा किया अनुभव

अयोध्या: अयोध्या में भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) की ओर से चिकित्सा क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों और उपचार पद्धतियों से डॉक्टरों को अपडेट रखने के उद्देश्य से एक विशेष मेडिकल एजुकेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। होटल कृष्णा पैलेस में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले सहित आसपास के क्षेत्रों के बड़ी संख्या में चिकित्सकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सा जगत में तेजी से हो रहे बदलावों और आधुनिक तकनीकों की जानकारी डॉक्टरों तक पहुंचाना था, ताकि मरीजों को और अधिक प्रभावी तथा गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में केजीएमयू के पूर्व न्यूरो सर्जन डॉ. क्षितिज श्रीवास्तव मौजूद रहे। उन्होंने न्यूरोलॉजिकल और अन्य गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान, उनके प्रमुख लक्षण और बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी बीमारी का समय पर पता चल जाना सफल उपचार की सबसे बड़ी कुंजी है। यदि शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न किया जाए और मरीज समय पर चिकित्सक से परामर्श ले, तो कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।
वहीं एम्स नई दिल्ली की प्रसिद्ध गायनकोलॉजिस्ट डॉ. नेहा नेगी ने आधुनिक सर्जरी तकनीकों पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने रोबोटिक सर्जरी और लैप्रोस्कोपिक यानी दूरबीन विधि से किए जाने वाले ऑपरेशन के फायदों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि इन आधुनिक तकनीकों के जरिए मरीजों के शरीर पर बड़े चीरे लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे कम दर्द होता है, रक्तस्राव कम होता है और संक्रमण का खतरा भी घट जाता है। साथ ही मरीज पहले की तुलना में काफी कम समय में स्वस्थ होकर अपने सामान्य जीवन में लौट सकता है।
इस मेडिकल एजुकेशन कार्यक्रम का आयोजन डॉ. आशीष श्रीवास्तव के नेतृत्व में किया गया, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता अयोध्या के पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिओम श्रीवास्तव ने की। मंच संचालन डॉ. शालिनी चौहान और डॉ. विनीत सिंह ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में डॉ. सईदा रिजवी, डॉ. रजनीश वर्मा, डॉ. सुमित वर्मा, डॉ. वीके गुप्ता, डॉ. सुनीता सिंह, डॉ. आनंद शुक्ल, डॉ. अरविंद मिश्रा, डॉ. आर.पी.एन. सिंह सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक मौजूद रहे।
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान लगातार विकसित हो रहा है। ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम डॉक्टरों को नई तकनीकों, आधुनिक उपचार पद्धतियों और शोध से जोड़ते हैं। इससे चिकित्सकों का ज्ञान बढ़ता है और वे अपने मरीजों को बेहतर, सुरक्षित और प्रभावी उपचार उपलब्ध करा पाते हैं। उपस्थित चिकित्सकों ने भी आईएमए के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के मेडिकल एजुकेशन कार्यक्रम भविष्य में भी नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता और अधिक बेहतर हो सके।




