एक बाबू का तबादला रुकवाने में जुटे कई धुरंधर इंजीनियर

Lucknow: अमौसी जोन के 11केवी एलटी में तैनात एक बाबू (Executive Assistant) का तबादला क्या हुआ पूरे जोन में हंगामा मच गया। मुख्य अभियंता (Chief Engineer) कार्यालय से लेकर मध्यांचल(MVVNL) दफ्तर तक पत्राचार होने लगा। लेसा में तैनात रहे दर्जन भर दुरंधर इंजीनियर बाबू का तबादला रुकवाने के लिए पैरवी करने में जुट गए हैं। बाबू की पकड़ विभाग में इस कदर है कि दक्षिणांचल जा चुके एक मुख्य अभियंता बाबू का ट्रांसफर कैंसिल कराने के लिए मध्यांचल से लेकर शक्ति भवन तक चक्कर काट रहे हैं।
विद्युत विभाग में इंजीनियर के अलावा कार्यकारी सहायक यानि बाबू भी मजबूत पकड़ रखते हैं। चाहे इंजीनियरों के लिए वसूली करना या फिर किसी अन्य तरीके से अफसर को खुश कर देना इन बाबुओं के बाएं हाथ का खेल है। इसी तरह के खेल में माहिर बाबू इन दिनों अमौसी जोन में चर्चा का केन्द्र बन गया। साल 2007-08 में लेसा के सेस डिवीजन से नौकरी शुरू करने वाला यह बाबू वर्टिकल व्यवस्था के तहत जोन के 11केवी डिवीजन में तैनात है।
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बाबू का दबदबा इस बात से लगाया जा सकता है कि डिवीजन में तैनात रहने वाले सभी इंजीनियर उसके इशारे पर काम करते नजर आते हैं। सेस डिवीजन में तैनात रह चुके लगभग सभी इंजीनियरों का संरक्षण उसको मिला हुआ है। नतीजा उसके तबादले कई बार बात आई मगर इंजीनियरों ने उसका नाम मुख्यालय को भेजा ही नहीं। इंजीनियरों की इसी रहमदिली की बदौलत बाबू अभी तक जोन में तैनात है।
विभाग में तैनाती और ट्रांसफर की सारी व्यवस्था ऑनलाइन ईआरपी पर होने के कारण अधिकारी उसको इस बार बचा नहीं पाए और मध्यांचल डिस्कॉम से उसका तबादला आदेश जारी हो गया। बाबू का रायबरेली ट्रांसफर कर दिया गया है। स्थानांतरण का आदेश आने के बाद भी बाबू रायबरेली जाने को तैयार नहीं है। उसने खुलेआम चुनौती दी है कि कुछ भी हो जाए कोई भी उसे रायबरेली भेज नहीं पाएगा। इस परेशानी के समय विभाग के कई इंजीनियर उसके साथ खड़े हो गए हैं।
इंजीनियर की गाड़ी से घूमता था बाबू
विभाग के कर्मियों की माने तो इस बाबू को अमौसी जोन से निलम्बित हो चुके एक इंजीनियर साहब अपनी गाड़ी से घुमाया करते थे। यह केवल एक वाकया नहीं सेस में तैनात रहने वाले कई इंजीनियरों का बाबू को वरदहस्त प्राप्त है। काम के बदले उपभोक्ताओं से रिश्वत मांगना। ठेकेदारों के बिल पास करने के एवज में दो प्रतिशत तक कमीशन लेने में बाबू का कई बार नाम आया। मगर हर बार उसे संरक्षण देने वाले इंजीनियरों ने शिकायतों को अनसुना किया और बगैर किसी कार्रवाई के मामला शांत कराया। नतीजा बाबू के हौसले लगातार बढ़ते चले गए और आज उसने एमडी के आदेश को चुनौती दे दी है।
रायबरेली में पोस्टिंग भी मिल चुकी है
अमौसी जोन से रायबरेली केवल तबादला ही नहीं हुआ है बल्कि वहां के मुख्य अभियंता राम चन्द्र श्रीवास्तव ने बाबू की पोस्टिंग भी कर दी है। चीफ इंजीनियर रायबरेली का पोस्टिंग आदेश अमौसी जोन तक पहुंच गया है मगर यहां के इंजीनियर उसका तबादला रुकवाने में एड़ी चोटी का जोर लगाए हैं। जिले से बाहर जा चुके तीन इंजीनियरों ने लखनऊ में डेरा डाल दिया है कि वह किसी प्रकार बाबू का तबादला रुकवा सके। इंजीनियरों ने मध्यांचल के निदेशक को समझा बुझा लिया है मगर कोई भी इसके लिए एमडी मध्यांचल से बात करने को राजी नहीं हो रहा है। हालांकि बाबू ने रो-रोकर मध्यांचल के कई अफसरों को यह समझाने की कोशिश की उसका ट्रांसफर हो जाने से उसके दो की पढ़ाई खराब हो जाएगी। बच्चों की देखभाल करने वाला परिवार में कोई नहीं है। हालांकि सूत्र बताते है कि बाबू के माता पिता उसके साथ ही रहते हैं जो स्कूल का वर्तमान सत्र पूरा होने तक बच्चों की देखभाल कर सकते हैं।




