UP Politics: स्वामी प्रसाद मौर्य ने Governor के कार्यकाल और KGMU VC की नियुक्ति पर उठाए गंभीर सवाल

अपनी जनता पार्टी (Apni Janata Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने संवैधानिक पदों और उच्च शिक्षण संस्थानों की नियुक्तियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर UP Governor के कार्यकाल और KGMU की कुलपति (Vice Chancellor) की पुनर्नियुक्ति पर जवाब मांगा है।
राज्यपाल के कार्यकाल पर मांगे सार्वजनिक आदेश
स्वामी प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक अहम पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि उत्तर प्रदेश में राज्यपाल का कार्यकाल आम तौर पर 5 साल का होता है। उन्होंने सवाल किया कि यदि 5 साल पूरे होने के बाद भी कोई व्यक्ति पद पर बना रहता है, तो इसका संवैधानिक आदेश सार्वजनिक होना चाहिए। अगर कार्यकाल बढ़ाने का कोई स्पष्ट आदेश नहीं है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
KGMU कुलपति की नियुक्ति पर साधा निशाना
पूर्व मंत्री ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) की कुलपति की दोबारा नियुक्ति को भी कटघरे में खड़ा किया। उनका आरोप है कि कुलपति पर भ्रष्टाचार (corruption) और आरक्षण नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगे हैं। ऐसे आरोपों के बावजूद उनकी पुनर्नियुक्ति (reappointment) किया जाना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने साफ कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों की साख बनाए रखने के लिए तय नियमों का पालन बेहद जरूरी है।
उत्तर प्रदेश में राज्यपाल का कार्यकाल सामान्यतः 5 वर्ष का होता है, लेकिन 5 वर्ष पूरे होने के बाद भी 7 वर्ष तक पद पर बने रहना गंभीर संवैधानिक सवाल खड़े करता है। यदि कार्यकाल बढ़ाने या पुनर्नियुक्ति का कोई स्पष्ट आदेश नहीं है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
वहीं KGMU की कुलपति…
— Swami Prasad Maurya (@SwamiPMaurya) August 11, 2026
SC/ST/OBC आरक्षण और सामाजिक न्याय का मुद्दा
स्वामी प्रसाद मौर्य ने इन नियुक्तियों को सीधे सामाजिक न्याय से जोड़ा। उन्होंने कहा कि संवैधानिक नियमों और आरक्षण व्यवस्था का सही पालन न होने से SC, ST और OBC वर्गों का हक मारा जा रहा है। सरकारी और शैक्षणिक संस्थानों में सभी वर्गों का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की है कि नियुक्तियों की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए।


