KGMU: बहराइच के युवक को था गंभीर ब्रेन हेमरेज, एंडोवास्कुलर फ्लो डाइवरटर तकनीक और आयुष्मान भारत से मिली नई जिंदगी

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के डॉक्टरों ने आधुनिक चिकित्सा तकनीक और त्वरित निर्णय से बहराइच निवासी 28 वर्षीय युवक की जान बचाई। मरीज बाएं पिकॉम आर्टरी (PCOM Artery) में रूप्चर्ड ब्लिस्टर/ब्लेब के कारण गंभीर ब्रेन हेमरेज से पीड़ित था।
युवक को अचानक तेज सिरदर्द, उल्टी और चक्कर आने की शिकायत के बाद गंभीर हालत में केजीएमयू लाया गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसे तत्काल इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी (IR) लैब रेफर किया गया। वहां डिजिटल सबट्रैक्शन एंजियोग्राफी (DSA) मशीन से मस्तिष्क की एंजियोग्राफी कर बीमारी की सटीक पहचान की गई।
मरीज की कमजोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने आयुष्मान भारत योजना के तहत आवश्यक चिकित्सा उपकरणों और सामग्री की व्यवस्था सुनिश्चित की।
रेडियोलॉजी और एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष की देखरेख में इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. मनोज कुमार, डॉ. सौरभ कुमार और उनकी टीम ने माइक्रो कैथेटर्स के जरिए एंडोवास्कुलर फ्लो डाइवरटर डिवाइस स्थापित की। इस आधुनिक तकनीक से क्षतिग्रस्त नस की सटीक मरम्मत की गई।
प्रोसीजर सफल रहने के बाद मरीज को तुरंत एनेस्थीसिया से बाहर (एक्सटुबेट) लाया गया। वर्तमान में मरीज न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. राजेश वर्मा की देखरेख में पूरी तरह स्वस्थ और स्थिर है।
सफल उपचार के बाद मरीज और उसके परिजनों ने केजीएमयू प्रशासन, कुलपति, डॉक्टरों की टीम और आयुष्मान भारत योजना के प्रति आभार व्यक्त किया।
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