सीतापुर की दरी को मिलेगा वैश्विक बाजार, 9 देशों के खरीदार पहुंचे क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में

सीतापुर, । उत्तर प्रदेश की एक जनपद-एक उत्पाद (ODOP) योजना के तहत सीतापुर की पारंपरिक दरी कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के उद्देश्य से दो दिवसीय क्रेता-विक्रेता सम्मेलन (Buyer & Seller Meet) का शुभारंभ शनिवार को सीतापुर शिक्षा संस्थान, रस्यौरा में हुआ। सम्मेलन का आयोजन 24 एवं 25 अक्टूबर को किया जा रहा है।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एमएसएमई मंत्री भूपेन्द्र सिंह चौधरी सहित स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार सिंह, कारागार राज्यमंत्री सुरेश राही, जनप्रतिनिधियों, जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर. एवं मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दीक्षा जोशी ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया।

150-200 साल पुरानी दरी कला को नई उड़ान
मंत्री भूपेन्द्र सिंह चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ODOP योजना ने प्रदेश की पारंपरिक कलाओं को नई पहचान दी है। सीतापुर की दरी बुनाई 150 से 200 वर्ष पुरानी गौरवशाली विरासत है। उन्होंने सम्मेलन को वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर. ने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य है कि सीतापुर के बुनकरों को अपने उत्पाद बेचने के लिए बाहर न जाना पड़े, बल्कि दुनिया भर के खरीदार स्वयं सीतापुर आएं। सम्मेलन में 9 देशों और 8 राज्यों के खरीदारों को स्थानीय बुनकरों से सीधे जोड़ा गया है।
9 देशों और 8 राज्यों के खरीदार शामिल
सम्मेलन में जापान, फिनलैंड, जर्मनी, इजराइल, दक्षिण अफ्रीका, पनामा, सऊदी अरब, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त अरब अमीरात के खरीदारों के साथ देश के 8 राज्यों—उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, केरल, तेलंगाना, तमिलनाडु और महाराष्ट्र—के प्रमुख खरीदार शामिल हो रहे हैं।
35 स्टॉल और लाइव बुनाई का प्रदर्शन
सम्मेलन में ODOP दरी के 35 प्रदर्शनी स्टॉल लगाए गए हैं। वहीं, पारंपरिक दरी बुनाई की कला को करीब से दिखाने के लिए 2 लाइव डेमो स्टॉल भी स्थापित किए गए हैं। दोनों दिनों में लगभग 500 बुनकर परिवारों की भागीदारी रहेगी।
आयोजन में सीतापुर के प्रसिद्ध समोसा, पेड़ा, मिर्च पकौड़ा और मलाई-मक्खन समेत लखनऊ मंडल के विभिन्न जनपदों के विशिष्ट व्यंजनों के स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र हैं।
यह सम्मेलन सीतापुर की सदियों पुरानी दरी कला को सीधे राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे स्थानीय बुनकरों को बेहतर बाजार, नए खरीदार और अपनी कला के उचित मूल्य मिलने की उम्मीद है।
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