UP

आठ साल में 62 फीसद बढ़ी यूपी में ट्रैक्टर्स की संख्या

आंकड़े बता रहे हैं कि यूपी में किसान खुशहाल हो रहे हैं, बदले दौर में किसानों की शान और संपन्नता के प्रमाण माने जाते हैं ट्रैक्टर

Lucknow: करीब चार दशक पहले गाँव के किसी किसान के घर के बाहर बंधे बैल उसकी हैसियत का प्रतीक हुआ करते थे। बैलों की जोड़ी जितनी मजबूत और सजी-धजी होती, किसान उतना ही संपन्न माना जाता। लेकिन वक्त बदला, तकनीक ने रफ्तार पकड़ी और ट्रैक्टर (Tractor) ने बैलों की जगह ले ली। आज वही ट्रैक्टर न सिर्फ खेती की रीढ़ बन गया है, बल्कि किसान की समृद्धि और आत्मनिर्भरता का प्रतीक भी।

उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां के खेतों में ट्रैक्टरों की गूंज अब आम हो चली है। बीते आठ वर्षों में प्रदेश में ट्रैक्टरों की संख्या में 62 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2017 में प्रदेश में करीब 88 हजार ट्रैक्टर थे। अब यह आंकड़ा 1.42 लाख से अधिक पहुंच चुका है।

क्यों बढ़ रही है ट्रैक्टरों (Tractor) की संख्या?

इस बदलाव के पीछे केवल आर्थिक सुधार नहीं, बल्कि किसानों को केंद्र में रखकर बनाई गई नीतियों और योजनाओं की एक लंबी श्रृंखला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बार-बार यह बात दोहराते रहे हैं कि उत्तर प्रदेश की नौ तरह की अलग-अलग कृषि जलवायु, इंडो गंगेटिक बेल्ट की दुनिया की सबसे उर्वर जमीन, गंगा, यमुना, सरयू जैसी सदानीरा नदियां, सबसे अधिक आबादी के कारण सस्‍ती मजदूरी और सबसे बड़ा इसे देश का “फूड बास्केट” बना सकता है। जरूरत बस इतनी है कि परंपरागत कृषि ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाए।

इसी सोच के तहत किसानों को जागरूक करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र, मिलियन फार्मर्स स्कूल, और किसान पाठशालाओं की स्थापना हुई। वहीं सरकार ने नवाचार और यंत्रीकरण को भी भरपूर बढ़ावा दिया।

ट्रैक्टर: खेती का बहुआयामी साथी

आज ट्रैक्टर (Tractor) सिर्फ जोताई का साधन नहीं, बल्कि एक बहुउपयोगी मशीन बन चुका है। इससे खेत की लेवलिंग, सीड ड्रिल से बुआई, पॉवर स्प्रेयर से छिड़काव, खोदाई, फसल अवशेष निस्तारण जैसे काम आसान हो गए हैं। इन कृषि यंत्रों पर सरकार 50% तक अनुदान देती है, जिससे किसानों का बोझ कम होता है और उत्पादन बढ़ता है।

भविष्य में और बढ़ेगी रफ्तार

जैसे-जैसे यंत्रीकरण बढ़ेगा, ट्रैक्टरों की मांग और बढ़ेगी। ट्रैक्टर अब खेती की कल्पना का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। आज ट्रैक्टर्स (Tractor) के बिना खेती की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।  इसका असर राष्ट्रीय स्तर पर भी दिख रहा है। वित्तीय वर्ष 2023 में 9.39 लाख ट्रैक्टरों की रिकॉर्ड बिक्री हुई, और 2025 में यह आंकड़ा 10 लाख तक पहुँचने की उम्मीद है। यकीनन आने वाले वर्षों में किसानों की आय एवं ट्रैक्टर्स की संख्या भी बढ़ेगी।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अच्छी रबी पैदावार, खरीफ में बेहतर मानसून का अनुमान और बढ़ती कृषि क्षमता इस रफ्तार को और तेज़ करेंगे।

ट्रैक्टर्स के लिहाज से देश का भी यही ट्रेंड

ट्रैक्टर्स (Tractor) की बिक्री के लिहाज से देश का भी ट्रेंड कमोबेश यही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मौजूदा वित्तीय वर्ष में की रिकॉर्ड (10 लाख) ट्रैक्टर्स की बिक्री की उम्मीद है। यह अब तक की सालाना बिक्री का रिकॉर्ड होगा। इसके पहले यह रिकॉर्ड वित्तीय वर्ष 2023 के नाम था। तब देश भर में 939713 ट्रैक्टर्स की बिक्री हुई थी। वित्तीय वर्ष 2024 में बिक्री की यह संख्या 867597 थी। बाजार के जानकारों के अनुसार रबी की अच्छी पैदावार, खरीफ में मौसम विभाग द्वारा अच्छी बारिश का पूर्वानुमान और बेहतर फसल नाते यह रिकॉर्ड बनना संभव होगा।

Sunil Yadav

संपादक, लेखक और अनुभवी पत्रकार हैं। वे दैनिक जागरण, आईनेक्‍स्‍ट, कैनविज टाइम्‍स और दैनिक जागरण आईनेक्‍स्‍ट से जुड़े रहे हैं। वह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति, प्रशासनिक ख़बरों, स्वास्थ्य सेवाओं, टेक्‍नोलॉजी से जुड़े विषयों पर लिखते हैं। ट्विटर (X) पर उनसे @sunilyadav21 पर जुड़ सकते हैं।

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