“भारतीय संस्कृति के नवजागरण की पहल: रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने ‘वैदिक नववर्षिका’ पत्रिका का किया भव्य विमोचन”

लखनऊ/नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘वैदिक नववर्षिका’ पत्रिका का भव्य विमोचन किया गया। इस अवसर पर देश के रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने नई दिल्ली स्थित अपने सरकारी आवास पर इस विशेष पत्रिका का लोकार्पण किया।
पत्रिका का प्रकाशन भारतीय नववर्ष महोत्सव समिति और All World Gayatri Pariwar के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है, जिसका उद्देश्य भारतीय नववर्ष और सनातन संस्कृति के महत्व को जन-जन तक पहुँचाना है।
संस्कृति और विरासत पर गर्व का संदेश
विमोचन के अवसर पर रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक पहचान अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली है। उन्होंने कहा,
“हमें अपनी संस्कृति और अपनी विरासत पर गर्व होना चाहिए। ऐसी पत्रिकाएं युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनती हैं।”
सम्मान और निमंत्रण
कार्यक्रम के दौरान भारतीय नववर्ष महोत्सव समिति के मुख्य संयोजक अभिषेक खरे ने रक्षा मंत्री को पारंपरिक अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। साथ ही उन्हें आगामी 18 मार्च 2026 को आयोजित होने वाले भारतीय नववर्ष महोत्सव के मुख्य कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सादर आमंत्रित किया।
भारतीय नववर्ष के प्रचार का संकल्प
पत्रिका के संपादक ज्ञान किशोर श्रीवास्तव ने बताया कि ‘वैदिक नववर्षिका’ का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति का व्यापक प्रचार-प्रसार करना है। यह पत्रिका लोगों को पाश्चात्य नववर्ष की चकाचौंध से अलग अपनी गौरवशाली भारतीय परंपरा और कालगणना को समझने तथा उत्साहपूर्वक मनाने के लिए प्रेरित करती है।
पाँच वर्षों से जारी अभियान
मुख्य संयोजक अभिषेक खरे के नेतृत्व में यह आयोजन पिछले पाँच वर्षों से लगातार किया जा रहा है। समिति का लक्ष्य घर-घर तक भारतीय कालगणना और उसके वैज्ञानिक महत्व को पहुँचाना है।
प्रमुख लोग रहे उपस्थित
इस गौरवपूर्ण अवसर पर संगठन के कई पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें विमर्श कुमार रस्तोगी (कोषाध्यक्ष), जितेंद्र सिंह चौहान, सतीश अग्रवाल, संजीव अग्रवाल, अजय अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, डॉ. शिशिर श्रीवास्तव, सुनील वैश्य, दीपक अग्रवाल और शैलेश टंडन प्रमुख रूप से शामिल रहे।
‘वैदिक नववर्षिका’ केवल एक पत्रिका नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सशक्त संकल्प बनकर सामने आई है।




