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SGPGIMS : कैंसर से जूझ रहे दो मासूमों को मिला नया जीवन, डॉक्‍टर्स ने हृदय तक फैले ट्यूमर को निकाला

लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपरस्पेशियलिटीज विभाग के डॉक्टरों ने कैंसर से जूझ रहे दो मासूम बच्चों को नई जिंदगी दी है। इनमें से एक बच्ची के किडनी का ट्यूमर नस के रास्ते दिल तक पहुंच चुका था। वहीं, दूसरे बच्चे के पैंक्रियाज में बड़ा ट्यूमर था। मल्टीडिसिप्लिनरी टीम के तालमेल से दोनों बच्चों के जटिल ऑपरेशन सफल रहे। दोनों की हालत अब स्थिर है और वे तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं।

पहला मामला: दिल तक पहुंचा ढाई वर्षीय बच्ची का ट्यूमर

बिहार की ढाई वर्षीय बच्ची को पेट में बड़ी गांठ की शिकायत के बाद संस्थान लाया गया था। जांच में दाहिनी किडनी में ‘विल्म्स ट्यूमर’  (Wilms Tumor) पाया गया। ट्यूमर किडनी से आगे बढ़ते हुए इन्फीरियर वेना कावा (IVC) नस के रास्ते दिल के दाहिने हिस्से (Right Atrium) तक पहुंच चुका था।

dr basant kumar
Dr Basant Kumar

पहले बच्ची को 9 साइकिल कीमोथेरेपी दी गई। इसके बाद पीडियाट्रिक सर्जरी, सीटीवीएस और एनेस्थीसिया टीम ने मिलकर कार्डियोपल्मोनरी बाईपास (Heart-Lung Machine) की मदद से सर्जरी की। डॉक्टरों ने प्रभावित किडनी, यूरेटर और दिल के दाहिने हिस्से तक फैले ट्यूमर थ्रोम्बस को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

दूसरा मामला: 4 वर्षीय बच्चे की व्हिपल सर्जरी (Whipple Procedure)

शाहजहांपुर के 4 वर्षीय बच्चे को पेट में गांठ और लगातार बुखार की शिकायत के कारण अस्पताल लाया गया था। जांच में पैंक्रियाज में बड़ा ट्यूमर मिला, जो ड्यूओडेनम और आसपास के अंगों को प्रभावित कर रहा था।

dr ankur mandelia
Dr Ankur Mandelia

डॉक्टरों ने बिना देरी किए सीधे सर्जरी (Upfront Surgery) करने का फैसला लिया। बच्चे की जटिल व्हिपल सर्जरी (Pancreaticoduodenectomy) की गई। पैंक्रियाज का हेड, ड्यूओडेनम और कॉमन बाइल डक्ट निकालकर पाचन तंत्र का जटिल पुनर्निर्माण किया गया। बच्चा अब सामान्य रूप से मुंह से आहार ले रहा है।

यह भी पढ़ें: SGPGIMS में बिना चीरा लगाए पैराथायरॉइड एडेनोमा का सफल इलाज, 8 घंटे में डिस्चार्ज हुआ मरीज

विशेषज्ञों की संयुक्त टीम को मिली सफलता

इन बच्‍चों की जटिल सर्जरी पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. बसंत कुमार के नेतृत्व में की गई। सर्जिकल टीम में प्रो. बसंत कुमार, प्रो. अंकुर मंडेलिया, डॉ. अंजू वर्मा, डॉ. तरुण कुमार, सीटीवीएस विभाग से प्रो. शांतनु पांडे और डॉ. अरीब खान शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम का जिम्मा डॉ. आशीष कन्नौजिया, डॉ. पल्लव सिंह और डॉ. कोमल पासवान ने संभाला।

बाल कैंसर जागरूकता माह: लक्षणों को न करें नजरअंदाज

सितंबर को ‘बाल कैंसर जागरूकता माह’ के रूप में मनाया जा रहा है। प्रो. बसंत कुमार ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों में दिखने वाले असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज न करें।

यदि बच्चे के पेट में गांठ या सूजन हो, बिना वजह तेज बुखार रहे, भूख व वजन घटे या लगातार कमजोरी दिखे, तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराएं। समय पर पहचान और सही इलाज से बच्चों के कैंसर को पूरी तरह मात दी जा सकती है।

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Sunil Yadav

संपादक, लेखक और अनुभवी पत्रकार हैं। वे दैनिक जागरण, आईनेक्‍स्‍ट, कैनविज टाइम्‍स और दैनिक जागरण आईनेक्‍स्‍ट से जुड़े रहे हैं। वह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति, प्रशासनिक ख़बरों, स्वास्थ्य सेवाओं, टेक्‍नोलॉजी से जुड़े विषयों पर लिखते हैं। ट्विटर (X) पर उनसे @sunilyadav21 पर जुड़ सकते हैं।

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One Comment

  1. Dear sir
    Myself Mahesh Arora, on behalf of all employees/officers would like to request you to please raise a serious issue of huge traffic jam, encrochment and illigal e-rikshaw/auto stand near main gate of SGPGI. Not only staff of pgi stuck in jam even patients and their relatives also face this serious problam daily.

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