केजीएमयू: हस्साम के सहारे डैमेज कन्ट्रोल की कोशिश

Lucknou: केजीएमयू (KGMU) प्रशासन द्वारा जिस हस्साम अहमद नाम के युवक को पकड़ा गया है वह मेडिकल कैम्प लगावाता था। उसका कसूर था कि उसने केजीएमयू के नकली लैटर पैड का इस्तेमाल किया जिस पर प्रोफेसर की फर्जी हस्ताक्षर कर केजीएमयू छात्रों को कैम्प में बुलाया। छात्रों ने कैम्प में जाकर मरीजों को चिकित्सीय सलाह दी।
गौर करने वाली बात यह है कि कैम्प में केजीएमयू के सीनियर फैकल्टी मेम्बर बतौर चीफ गेस्ट शामिल हो चुके हैं। इन सारी बातों के बीच अभी तक किसी भी छात्र ने धर्मांतरण कराने के प्रयास की बात कबूल नहीं की है फिर केजीएमयू प्रशासन हस्साम को धर्मांतरण के रैकेट का सदस्य साबित कर रमीज प्रकारण में हुई फजीहत की भरपाई कर रहा है। मालूम हो कि करीब चार माह पूर्व केजीएमयू में कथित लव जिहाद और धर्मांतरण का मामला खूब चर्चा में आया था। उस वक्त केजीएमयू प्रशासन पर मामले को दबाने के प्रयास के आरोप लगे थे। जब प्रकरण मीडिया में आ गया तो आनन फानन में केजीएमयू प्रशासन ने आंतरिक जांच कमेटी बना दी।

कमेटी के नेतृत्व का जिम्मा सौंपा गया प्रो. केके सिंह को। कमेटी कुछ कर पाती उससे पहले ही आरोपी रेजिडेंट डॉ. रमीज को पुलिस ने पकड़ लिया। इसके बाद में प्रकरण की जांच एसटीएफ को सौंप दी गई। इस मामले में केजीएमयू प्रशासन की काफी फजीहत हुई थे। कैम्पस में कथित लव जिहाद के प्रकरण को लेकर केजीएमयू प्रशासन पर भी कई आरोप लगे। मामला महिला आयोग से लेकर मुख्यमंत्री तक भी पहुंच गया था। इससे चिविवि की छवि को बहुत नुकसान हुआ। उस नुकसान की भरपाई केजीएमयू प्रशासन हस्साम के माध्यम से करना चाहता है। मंगलवार को जिस प्रकार केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने कार्डियो सेवा फाउंडेशन चलाने वाले हस्साम अहमद द्वारा किए गए फर्जीवाड़े को धर्मांतरण की ओर मोडऩे की कोशिश की उससे साफ जाहिर हो रहा है कि अफसर उसके सहारे डैमेज कन्ट्रोल करना चाहते हैं।
अभी तक कोई छात्रा सामने नहीं आई
केजीएमयू प्रशासन द्वारा हस्साम को पकड़े हुए दो दिन हो रहे हैं। अभी तक किसी भी छात्रा ने आगे आकर यह स्वीकार नहीं किया है कि हम्मास ने उनका धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस यह कह रही है कि आरोपी के मोबाइल से कई सबूत मिले हैं जिनकी जांच हो रही है। पुलिस ने अभी तक धर्मांतरण का अंदेशा नहीं जताया है। इस नए घटनाक्रम के सहारे केजीएमयू प्रशासन यह जताने की कोशिश कर रहा है कि पूर्व में बनाई गई आंतरिक कमेटी अभी भी जांच कर रही है हस्साम उसी जांच के कारण पकड़ा गया है। मगर कमेटी यह नहीं बता पा रही कि अगर हस्साम फर्जी काम कर रहा था तो सीनियर फैकल्टी किसके इशारे पर मेडिकल कैम्प में बतौर चीफ गेस्ट शामिल हुए थे।
पुलिस में दर्ज हो चुका है केस
केजीएमयू प्रॉक्टर प्रो. आरएएस कुशवाहा के पत्र लिखने के बाद पुलिस ने हस्साम के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 319(2) 338, 336(3), 340(2) के तहत केस दर्ज कर आरोपी को हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने अपनी एफआईआर में मरीजों व तीमारदारों से ठगी करने के साथ कार्डियो सेवा संस्थान के नाम पर अवैध धन वसूली का भी मामला दर्ज किया है। मडिय़ांव लखनऊ के अजीज नगर निवासी हम्मास पर आरोप है कि हस्साम अहमद ने धोखाधड़ी, कूटरचना एवं अन्य आपराधिक कृत्य किए हैं।
पुलिस के अनुसार जांच में यह प्रकाश में आया कि अभियुक्त द्वारा दिनांक 13.04.2026 को सर्जरी विभाग के प्रोफेसर एवं डीन पैरामेडिकल डॉ. के.के. सिंह के फर्जी हस्ताक्षर बनाकर एमबीबीएस 2023 बैच के छात्रों के नाम नकली पत्र जारी किया था जिसमें 29 अप्रैल को एम्स दिल्ली में आयोजित कथित कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने का उल्लेख किया गया था, जो पूरी तरह से गलत पाया गया। आरोपी के पास से मिले मोबाइल फोन की जांच में कई संदिग्ध दस्तावेज प्राप्त हुए हैं। वह एमबीबीएस छात्राओं को कॉन्फ्रेंस के नाम पर भ्रमित कर दिल्ली अथवा अन्य स्थानों पर ले जाने का प्रयास कर रहा था, जो गंभीर आपराधिक षड्यंत्र की ओर इंगित करता है।
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