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केजीएमयू के डाक्टरों ने छाती में धंसा चाकू निकाल बचाई युवक की जान

केजीएमयू आने तक छह घंटे मौत से जूझता रहा युवक

Lucknow: लखीमपुर खीरी निवासी 34 वर्षीय सर्वेश के लिए 4 जुलाई की रात किसी भयावह सपने से कम नहीं थी। रात करीब नौ बजे धारदार हथियार से हुए हमले में चाकू का ब्लेड उनकी दाहिनी छाती में धंस गया। ब्लेड अंदर तक फेफड़े की मुख्य रक्तवाहिनी के पास पहुंच गया था। करीब छह घंटे तक युवक मौत से जूझता रहा। केजीएमयू ट्रामा सेन्टर में डाक्टरों ने एक जटिल ऑपरेशन कर उसकी जान बचाई।

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केजीएमयू ट्रामा सर्जरी के डॉ. समीर मिश्रा ने बताया कि यहां आने से पहले सर्वेश को पहले लखीमपुर खीरी जिला अस्पताल ले जाया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद उसे केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया, जहां वह अगले दिन सुबह करीब पांच बजे पहुंचे। करीब छह घंटे तक सीने में धंसे चाकू के साथ दर्द सहते हुए उन्होंने जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई लड़ी। केजीएमयू पहुंचते ही ट्रॉमा टीम ने बिना समय गंवाए मरीज का परीक्षण किया। एक्स-रे और सीटी स्कैन में सामने आया कि ब्लेड दाहिने फेफड़े के पल्मोनरी हिलम तक पहुंच चुका है और पल्मोनरी आर्टरी की शाखा को नुकसान पहुंचा चुका है।

डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि यदि ब्लेड को बिना तैयारी के निकाल दिया जाता तो अनियंत्रित रक्तस्राव से मरीज की मौके पर ही मौत हो सकती थी। इसलिए विशेषज्ञों ने पूरी रणनीति के साथ ऑपरेशन करने का फैसला लिया। सीटीवीएस टीम के नेतृत्व में राइट एंटेरोलैटरल थोराकोटॉमी की गई। ऑपरेशन के दौरान पहले क्षतिग्रस्त रक्तवाहिनी पर नियंत्रण स्थापित किया गया, फिर डॉक्टरों ने सीधे दृष्टि में बेहद सावधानी से चाकू का ब्लेड बाहर निकाला। पल्मोनरी आर्टरी की घायल शाखा की सफल मरम्मत कर रक्तस्राव रोका गया। ऑपरेशन के दौरान मरीज को तीन यूनिट रक्त और चार यूनिट प्लाज्मा भी चढ़ाया गया।

आईसीयू में भर्ती है सर्वेश

ऑपरेशन के बाद सर्वेश की हालत स्थिर है और आईसीयू में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में लगातार सुधार हो रहा है। इस जटिल सर्जरी को डॉ. वैभव जायसवाल के नेतृत्व में ट्रॉमा, सीटीवीएस, एनेस्थीसिया, रेडियोलॉजी, ब्लड बैंक और क्रिटिकल केयर की संयुक्त टीम ने सफल बनाया। डॉक्टरों ने सलाह दी कि यदि किसी व्यक्ति के शरीर में कोई धारदार हथियार धंस जाए तो उसे घटनास्थल या अस्पताल पहुंचने से पहले निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। कई बार वही हथियार अस्थायी रूप से रक्तस्राव को रोकता है और उसे जल्दबाजी में निकालना जानलेवा साबित हो सकता है।

इन डाक्टरों ने किया सहयोग

डॉ. वैभव जायसवाल, डॉ. अनीकेश, डॉ. अर्पिता, डॉ. ताहिर, डॉ. प्रज्जवल, डॉ. महेश, डॉ. धैर्य और डॉक्टर मोहतास्सिन ने इस जटिल सर्जरी में अपना योगदान दिया।

Mahima Tiwari

महिमा तिवारी, द कवरेज में सीनियर पत्रकार हैं। पत्रकारिता में 23 साल का अनुभव रखतीं हैं। वह राजनीति, हेल्थ, लाइफ स्‍टाइल और ह्यूमन एंगल स्टोरीज लिखती हैं। महिलाओं और बच्चों से संबंधित मुद्दों पर भी लिखना पसंद है।

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