पैरामेडिकल कर्मियों को सिखाईं इमरजेंसी की बारीकियां, एरा मेडिकल कॉलेज में क्रिटिकल केयर पर बड़ा वर्कशॉप

लखनऊ। जीवन बचाने की दिशा में पहला कदम उठाने वाले पैरामेडिकल और नर्सिंग कर्मियों को इमरजेंसी व क्रिटिकल केयर की महत्वपूर्ण बारीकियां सिखाई गईं। यह प्रशिक्षण लखनऊ स्थित एराज लखनऊ मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में ‘फर्स्ट नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ नर्सिंग इमरजेंसी, क्रिटिकल केयर एण्ड ट्रामा एलाइड रिस्पॉन्डर’ विषय पर आयोजित वर्कशॉप में दिया गया।
डॉ. मुस्तहसिन मलिक के नेतृत्व में आयोजित इस वर्कशॉप में विशेषज्ञों ने बताया कि किसी गंभीर मरीज का इलाज शुरू होने से पहले, चाहे वह सड़क दुर्घटना में घायल हो या हार्ट अटैक का रोगी, उसकी देखभाल किस प्रकार की जानी चाहिए।

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बीएलएस, एटीएलएस और सीपीआर पर विशेष प्रशिक्षण
वर्कशॉप के संयोजक व क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. मुस्तहसिन मलिक ने जानकारी दी कि इसमें नर्सिंग और पैरामेडिकल कर्मियों को बीएलएस (बेसिक लाइफ सपोर्ट), एटीएलएस (एडवांस ट्रामा लाइफ सपोर्ट) और सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण दिया गया।

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ट्रामा केयर के नियम: गंभीर सड़क दुर्घटना के मरीज को ट्रॉमा इमरजेंसी में लाए जाने पर सबसे पहले कॉलर लगाकर ऑक्सीजन का स्तर जांचने और तुरंत ऑक्सीजन लगाने की सलाह दी गई। इसके बाद, बगैर समय गंवाए ड्रिप लगाकर एक्स-रे व सीटी स्कैन कराने पर जोर दिया गया ताकि चोट की सही जानकारी मिलते ही आगे का इलाज शुरू किया जा सके।
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हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में अंतर: विशेषज्ञों ने समझाया कि इमरजेंसी में तैनात कर्मियों को हार्ट अटैक (जिसमें मरीज बेहोश नहीं होता) और कार्डियक अरेस्ट (जिसमें बेहोशी की संभावना अधिक होती है) के बीच का अंतर समझना जरूरी है। प्रशिक्षण में इन मरीजों की जांच, इलाज और सीपीआर देने की सही तकनीक सिखाई गई। साथ ही, हार्ट अटैक के मरीज को तुरंत डिस्प्रिन देने के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
आईसीयू में फिजियोथेरेपी की अहम भूमिका
दिल्ली एम्स से आए डॉ. बंटी तुलसीराम ने बताया कि आईसीयू में भर्ती मरीजों की रिकवरी में फिजियोथेरेपी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
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फिजियोथेरेपी से मरीजों में मांसपेशियों की कमजोरी कम होती है और फेफड़ों की कार्यक्षमता बेहतर होती है।
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डीप ब्रीदिंग, इंसेंटिव स्पाइरोमीटर, चेस्ट फिजियो और पोजिशनल ड्रेनेज जैसी तकनीकों से श्वसन में सुधार मिलता है।
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‘पैसिव रेंज ऑफ मोशन’ एक्सरसाइज से जॉइंट स्टिफनेस और बेडसोर का खतरा घटता है।
वर्कशॉप में एम्स दिल्ली से डॉ. अंजलि शुक्ला, मेदांता की निदेशक नर्सिंग डॉ. प्रिसिला फर्नाडिंस व डॉ. खालिद इकबाल समेत कई चिकित्सक मौजूद थे।
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