UP

बिजली संकट के लिए जिम्मेदार एमडी मध्यांचल

Lucknow: भीषण गर्मी में लखनऊ समेत कई जिले बिजली संकट का सामना कर रहे हैं। ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं और केबिल जल रही है। इस बीच एमडी मध्यांचल इंजीनियरों को चेतावनी दे रही ही हैं कि ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने पर कार्रवाई की जाएगी। बिजली संकट की असल वजह मध्यांचल प्रबंधन के गलत फैसले हैं।

कर्मचारियों की छटनी ऐसे की गई कि उपकेन्द्रों को तीन गैंग मिले जो 8-8 घंटे सप्लाई का जिम्मा संभाल रहे हैं। गैंग के तीन कर्मियों के सहारे ही जेई को आपूर्ति बहाल रखनी है। अनुरक्षण के लिए जरूरी सामग्री भी उपलब्ध नहीं है। सामग्री के लिए अवर अभियंता स्टोर में दिन भर लाइन लगाते हैं।

supply

प्रदेश में मार्च 2023 में बिजली कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल की तो आपूर्ति बाधित करने के नाम पर दर्जनों पर कर्मियों पर कार्रवाई की गई। कर्मचारी नेता निलम्बित किए गए संविदा कर्मियों को नौकरी से हटा दिया गया।

जब न्यायालय ने इसका संज्ञान लिया तो तत्कालीन अपर मुख्य सचिव ऊर्जा ने कोर्ट में हलफनामा दे दिया गया कि आपूर्ति बाधित करने के लिए पीछे जो भी कर्मचारी थे उन पर कार्रवाई कर दी गई है। उन कार्रवाइयों की फाइलें अभी भी शक्ति भवन में पड़ी धूल फांक रही हैं। अब एक बार फिर बिजली संकट के हालात पैदा हो गए हैं।

 

प्रबंधन ने पैदा किए बिजली संकट के हालात

लखनऊ समेत मध्यांचल निगम के अधीन आने वाले 19 जिलों में एक बार फिर से बिजली संकट के हालात पैदा हो गए हैं। काम करने के लिए विद्युत उपकेन्द्रों पर कर्मचारी नहीं हैं। काम हो सके इसके लिए सामग्री भी नहीं है। हालत यह हैं कि अगर किसी इलाके में एक समय में दो से तीन जगहों पर सप्लाई में बाधा आए तो गैंग एक ही कम्प्लेन ठीक कराने के लिए भेजा जा सकता है। यानि शेष दो शिकायतकर्ता केवल इंतजार ही कर सकते हैं। यह स्थिति हंगामे से लेकर मारपीट तक कभी बदल सकती है जिसका खामियाजा क्षेत्रीय कर्मियों को झेलना होगा। लम्बी दूरी वाले फीडरों के लिए यह समस्या कभी भी भयानक रूप ले सकती है।

MD MVVNL
MD MVVNL

फेस अटेंडेंस बढ़ा रही दिक्कतें

विद्युत कर्मियों की ड्यूटी उनकी हाजिरी से तय की जा रही है। लाइन स्टाफ जिसे आठ घंटे काम करना है और फेस अटेंडेंस इन-आउट के जरिए अपने कार्यालय के सौ मीटर के दायरे में लगाना है। इन कर्मियों की समस्या है कि अगर ड्यूटी खत्म होने का समय हो और कम्प्लेन आ जाए तो वह क्या करें। अगर कम्प्लेन बनाने गए तो हाजिरी कैसे लगाएंगे और हाजिरी लगाने के लिए उपकेन्द्र पर रुके तो कम्प्लेन कैसे बनेगी। इस समस्या का समाधान किसी भी अधिकारी के नही है।

प्रबंधन का सच नहीं बता रहे चापलूस अधिकारी

विभाग में चापलूस अधिकारियों की लम्बी चौड़ी लिस्ट है। मुख्य अभियंता स्तर पर बैठने वाले यह अधिकारी चेयरमैन और एमडी की मीटिंग में वर्टिकल व्यवस्था को हाइटेक बताने से नहीं चूक रहे। वर्टिकल व्यवस्था में मैन पावर की कमी और सामग्री की किल्लत के बारे में यह न तो सुनना चाहते हैं और न ही मीटिंग में प्रबंधन को बताने को तैयार हैं। फील्ड में काम करने वाले इंजीनियर किन परेशानियों का सामना कर रहे हैं उसकी जानकारी शक्ति भवन व मध्यांचल तक पहुंचे उसमें यह चापलूस अधिकारी ही रोड़ा बने हैं। अपने आर्थिक हितों का साधने के लिए अधिकारी दिन में दो से तीन बार तक कलेक्शन के कार्यालय पहुंच रहे हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button