
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के न्यूरोसर्जरी विभाग ने एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश की है। ट्रॉमा सेंटर में इलाज के लिए लाए गए एक अज्ञात (Destitute) मरीज को न केवल नया जीवन दिया गया, बल्कि 8 साल पहले बिछड़े उसके परिवार से भी मिलवाया गया। 3 जनवरी को युवक को झारखंड से आए परिजनों को सौंप दिया गया।
रेलवे ट्रैक के पास मिला था घायल युवक
केजीएमयू के न्यूरो सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. बीके ओझा ने बताया कि यह मामला 22 दिसंबर 2024 का है, जब बाराबंकी के एक नेक दिल राहगीर को रेलवे ट्रैक के पास एक युवक लहूलुहान और बेहोश अवस्था में मिला। राहगीर ने बिना समय गंवाए उसे KGMU के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया। प्रारंभिक जांच और सीटी स्कैन में पता चला कि युवक के दिमाग में गंभीर ब्लीडिंग (Brain Bleeding) है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए न्यूरोसर्जरी टीम ने तुरंत उसका मुफ्त ऑपरेशन किया और उसे आईसीयू (ICU) में शिफ्ट किया।
धुंधली यादों से मिला घर का पता
इलाज के दौरान जब मरीज को धीरे-धीरे होश आया, तो उसने अपनी टूटी-फूटी भाषा में कुछ नाम लिए— जैसे डिजिल सोरेन, दखिन सोरेन और कनई सोरेन। इसके बाद उसने अपने गांव का नाम ‘बर्डी’ (कानपुर) और थाना ‘चिकुलिया’ बताया, जो झारखंड राज्य में स्थित है।
न्यूरोसर्जरी विभाग के टेक्नीशियन अतुल उपाध्याय ने इन सूचनाओं के आधार पर झारखंड पुलिस से संपर्क साधा और कड़ी मशक्कत के बाद मरीज के परिजनों को खोज निकाला।

डॉ. बीके ओझा व अपने परिजनों के साथ पीली टीशर्ट में मरीज
12 साल की उम्र में हुआ था लापता
परिजनों ने बताया कि यह युवक 8 साल पहले महज 12 साल की उम्र में घर से लापता हो गया था। सामान्य से कम बौद्धिक क्षमता होने के कारण वह रास्ता भटक गया था। परिजनों ने सालों तक उसे खोजा लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। जब उन्हें KGMU से फोन गया और युवक का आधार कार्ड मैच हुआ, तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
इन ‘हीरोज’ का रहा विशेष योगदान
मरीज की सेवा और रिकवरी में न्यूरो सर्जरी ट्रॉमा सेंटर (फर्स्ट फ्लोर) की सिस्टर इंचार्ज रजनी सिंह और उनकी टीम ने दिन-रात मेहनत की। वहीं, घर का पता लगाने में अतुल उपाध्याय की सोशल पुलिसिंग की भूमिका अहम रही। केजीएमयू का न्यूरोसर्जरी विभाग अब तक 200 से अधिक ऐसे बेसहारा मरीजों को उनके अपनों से मिलवाने में सफल रहा है।
कुलपति ने दी बधाई
KGMU की कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने उस राहगीर की जमकर सराहना की जो घायल को अस्पताल तक लेकर आया। उन्होंने पूरी न्यूरोसर्जरी टीम को इस सफल ऑपरेशन और मरीज को उसके परिवार तक पहुंचाने के लिए आशीर्वाद और शुभकामनाएं दी हैं।




