
जींद, 17 जुलाई 2026 — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से भारत की पहली हाइड्रोजन (Hydrogen fuel) से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखा दी। इस ट्रेन का नाम NaMo Green Rail रखा गया है और यह पूरी तरह हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर चलती है।
यह ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। ट्रेन नंबर 74010 जींद से सुबह 7:40 बजे निकलेगी और सोनीपत सुबह 9:40 बजे पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन नंबर 74009 सोनीपत से सुबह 10:40 बजे चलेगी और जींद दोपहर 1 बजे पहुंचेगी।
ट्रेन में कोच और क्षमता
यह 10 कोच वाली ट्रेन है। इसमें 2 पावर कार और 8 पैसेंजर कोच हैं। कुल 682 सीटें हैं और एक बार में करीब 2600 यात्री सफर कर सकते हैं।
हर पावर कार 1200 किलोवाट यानी करीब 1600 हॉर्सपावर की है। कुल मिलाकर ट्रेन 2400 किलोवाट यानी 3200 हॉर्सपावर की ताकत रखती है। यह ब्रॉड गेज पर दुनिया की सबसे लंबी और सबसे ताकतवर हाइड्रोजन ट्रेन मानी जा रही है।
जींद स्टेशन पर ही बनेगा हाइड्रोजन
जींद स्टेशन पर ही हाइड्रोजन बनाने का प्लांट लगाया गया है। यहां इलेक्ट्रोलिसिस विधि से हाइड्रोजन तैयार की जाएगी। प्लांट रोजाना 420-430 किलोग्राम हाइड्रोजन बना सकता है और 3000 किलोग्राम हाइड्रोजन स्टोर कर सकता है।
ट्रेन किन स्टेशनों पर रुकेगी?
ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच चलेगी। मुख्य स्टॉपेज: जींद सिटी, पांडू पिंडारा, ललित खेड़ा, भांबेवा, ईशापुर खेड़ी, बुटाना, खांडराई, गोहाना, राभड़ा, लाठ, मोहाना (हरियाणा) और बरवासनी।
- ट्रेन नंबर 74010: जींद सुबह 7:40 बजे छूटेगी, सोनीपत सुबह 9:40 बजे पहुंचेगी।
- वापसी ट्रेन नंबर 74009: सोनीपत सुबह 10:40 बजे छूटेगी, जींद दोपहर 1:00 बजे पहुंचेगी।
एक तरफ की यात्रा में लगभग 2 घंटे लगेंगे। ट्रेन की परिचालन स्पीड 75 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है। परीक्षण के दौरान यह 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक की रफ्तार पकड़ चुकी है।
यह ट्रेन क्यों जरूरी है?
भारतीय रेलवे ज्यादातर ट्रेनों को बिजली से चला रहा है। लेकिन कुछ ऐसे रूट हैं जहां बिजली की लाइन डालना मुश्किल या महंगा पड़ता है। हाइड्रोजन ट्रेन ऐसे रूटों के लिए अच्छा विकल्प है। भविष्य में इसे विरासत रूटों और अन्य गैर-विद्युतीकृत लाइनों पर भी चलाने की योजना है।
प्रधानमंत्री मोदी के इस कार्यक्रम के साथ हरियाणा और पंजाब में कुल 25,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और शिलान्यास भी हुआ है।
ट्रेन ने सभी सुरक्षा टेस्ट पास कर लिए हैं। हाइड्रोजन लीक डिटेक्शन सिस्टम और फ्लेम डिटेक्शन सिस्टम भी लगाए गए हैं।




