KGMU: शरीर के आर-पार घुसी 4 लोहे की सरियां, 8.5 घंटे चले जटिल ऑपरेशन से डॉक्टरों ने बचाई मजदूर की जान

लखनऊ: किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टर्स ने एक बार फिर अपनी विशेषज्ञता और समर्पण का लोहा मनवाया है। एक ओर जहां विश्वविद्यालय अपने 22वें दीक्षांत समारोह में चिकित्सकों का सम्मान कर रहा था, वहीं दूसरी ओर ऑपरेशन थिएटर में सर्जन डॉक्टर्स की टीम ने 23 वर्षीय युवक के शरीर के आर-पार घुसी 4 लोहे की सरियों को निकालकर उसे मौत के मुंह से वापस खींच जान बचा लिया।
युवक के शरीर में बाएं नितंब से घुसकर पेट और छाती को भेदते हुए चार लोहे की सरियां धंसी हुई थीं। इनमें से तीन दाएं कंधे और गर्दन के पास निकल रही थीं, जबकि एक रीढ़ के पास पीठ से बाहर निकली हुई थी।

ऊंचाई से सरियों पर आ गिरे
फर्रुखाबाद निवासी उमेश (23), मजदूरी का काम करते हैं। 13 जुलाई 2026 को सुबह करीब 4:30 बजे वे बादशाहनगर स्थित एक निर्माणाधीन इमारत पर काम कर रहे थे। इस दौरान अचानक बैलेंस बिगड़ने से वह नीचे आ गिरे। ऊंचाई से गिरने के दौरान वे लोहे की सरियों पर जा गिरे। सरियां उनके शरीर में आर पार धंस गईं और वे उन्हीं में फंस गए। चार सरियां उसके बाएं नितंब (Left Buttock) से प्रवेश कर पेट और छाती को चीरते हुए शरीर से बाहर निकल आईं।

इनमें से तीन सरियां दाहिने कंधे और गर्दन के पास तक पहुंच गई थीं, जबकि एक सरिया रीढ़ (Spine) के पास पीठ की ओर से बाहर निकली थी। स्थानीय लोगों ने सरियों को काटकर उन्हें उसी अवस्था में तुरंत केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया, जहां उन्हें सुबह करीब 5:30 बजे भर्ती किया गया।
अस्पताल पहुंचने पर मरीज की हालत बेहद गंभीर थी। ब्लड प्रेसर अस्थिर था और पेशाब में खून आ रहा था। सीटी स्कैन में पता चला कि चारों सरियां मूत्राशय, छोटी आंत, आमाशय, प्लीहा, पेट की प्रमुख रक्तवाहिकाओं, डायाफ्राम और बाएं फेफड़े को भेद चुकी थीं। इससे न्यूमोथोरैक्स (फेफड़े में हवा भरना) हो गया था। तुरंत दोनों तरफ इंटरकॉस्टल ड्रेन लगाए गए और मरीज को ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया।
लगभग साढ़े आठ घंटे चली जटिल सर्जरी
प्रो. डॉ. समीर मिश्रा और डॉ. नरेंद्र कुमार के नेतृत्व में सर्जिकल टीम ने लैपरोटॉमी के साथ बाईं तरफ एंटेरोलेटरल थोरैकोटॉमी की। सबसे पहले प्रमुख रक्तवाहिकाओं को नियंत्रित किया गया, उसके बाद चारों सरियों को प्रत्यक्ष दृष्टि में अत्यंत सावधानी से निकाला गया। चौथी सरिया हृदय और बाएं फेफड़े के हिलम के बेहद करीब थी।

जब हृदय के पास मौजूद चौथी सरिया निकाली जा रही थी, तब मरीज का रक्तचाप (Blood Pressure) अचानक गिर गया, जिसे एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. विपिन के नेतृत्व वाली टीम ने तत्काल नियंत्रित कर जान बचाई।
ऑपरेशन के दौरान क्षतिग्रस्त अंगों की मरम्मत की गई और मरीज को 6 यूनिट पैक्ड रेड ब्लड सेल्स (PRBC) और 6 यूनिट फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (FFP) चढ़ाया गया। सर्जरी सुबह 7 बजे शुरू होकर दोपहर 3:30 बजे तक चली (लगभग 8 घंटे 30 मिनट)।
ऑपरेशन करने वाली टीम
- प्रो. डॉ. समीर मिश्रा – Sr. Consultant In-charge
- डॉ. नरेंद्र कुमार – Consultant In-charge
- डॉ. यदवेन्द्र धीर – Consultant
- डॉ. रैम्बिट – Senior Resident
- डॉ. चरणवीर – Senior Resident
- डॉ. महेश – Junior Resident-3
- डॉ. प्रज्ज्वल – Junior Resident-3
- डॉ. धैर्य – Junior Resident-2
- डॉ. अंकित – Junior Resident-2
- डॉ. अखंड – Junior Resident-2
- डॉ. मोहतास्सिन – Junior Resident-1
- डॉ. सागर – Junior Resident-1
- डॉ. पार्थ – Junior Resident-1
मरीज की स्थिति में सुधार
मरीज की हालत स्थिर है। रक्तचाप, नाड़ी और ऑक्सीजन स्तर सामान्य हो चुका है। मरीज आईसीयू में क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों की निगरानी में निरंतर स्वस्थ हो रहे हैं। मरीज के आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण केजीएमयू और चंदरानी जैन चैरिटेबल ट्रस्ट, चौक के संयुक्त प्रयास से उन्हें समय पर आर्थिक और मानवीय सहायता उपलब्ध कराई गई, जिससे इलाज बिना किसी बाधा के जारी रह सका।
केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने पूरी सर्जिकल टीम को बधाई दी और मरीज के शीघ्र पूर्ण स्वस्थ होने की कामना की।

डॉक्टरों का महत्वपूर्ण संदेश
ट्रॉमा सर्जनों ने बताया कि यदि किसी मरीज के सीने या शरीर में कोई नुकीली वस्तु या हथियार धंसा हो, तो उसे कभी भी ऑपरेशन थिएटर के बाहर नहीं निकालना चाहिए। इन्हें बाहर निकालने से जानलेवा ब्लीडिंग (Bleeding) हो सकती है।

पहले मरीज को स्थिर करना, आवश्यक जांच और इमेजिंग करना तथा पर्याप्त शल्य तैयारी व रक्तवाहिकाओं के नियंत्रण के बाद ही ऑपरेशन थिएटर में उस वस्तु को निकालना चाहिए। यही तरीका मरीज की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।




