SGPGI में हार्ट स्टेंट वाले बुजुर्ग मरीज की जटिल हिप सर्जरी

लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS) ने एक और बड़ी मेडिकल कामयाबी हासिल की है। यहां ऑर्थोपेडिक्स विभाग के डॉक्टरों ने एक जटिल और दुर्लभ हिप फ्रैक्चर का सफल ऑपरेशन किया है। इस सर्जरी से एक बुजुर्ग मरीज को नई जिंदगी मिली है।
मरीज की मेडिकल हिस्ट्री बेहद गंभीर थी। महज दो महीने पहले उन्हें गंभीर हार्ट अटैक आया था। इसके बाद उनके हृदय की धमनियों में दो ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट (Drug-Eluting Stents) लगाए गए थे। ऑपरेशन के वक्त मरीज ड्यूल एंटीप्लेटलेट थेरेपी (DAPT) पर थे।
ऐसी स्थिति में सर्जरी करना डॉक्टरों के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था। एक तरफ अत्यधिक खून बहने का बड़ा जोखिम था। वहीं दूसरी तरफ, अगर दवाएं बंद की जातीं, तो स्टेंट में खून का थक्का (स्टेंट थ्रॉम्बोसिस) बनने का जानलेवा खतरा था।
चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, बुजुर्गों में हिप फ्रैक्चर एक ‘ऑर्थोपेडिक इमरजेंसी’ है। अगर ऑपरेशन में देरी होती है, तो मरीज को निमोनिया, डीप वेन थ्रॉम्बोसिस और बेड सोर जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इससे मृत्यु का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। हार्ट में स्टेंट वाले मरीज की इतनी बड़ी सर्जरी करना आधुनिक चिकित्सा की सबसे कठिन चुनौतियों में गिना जाता है।
मरीज की ज्यादा उम्र और गंभीर बीमारियों को देखते हुए उन्हें ‘हाई-रिस्क’ (High-Risk) श्रेणी में रखा गया था। इसके लिए ऑर्थोपेडिक्स, कार्डियोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग ने मिलकर एक खास बहुविषयक (Multidisciplinary) उपचार योजना बनाई।
सर्जरी से पहले की गई प्लानिंग के तहत मरीज को अल्ट्रासाउंड-गाइडेड कंटीन्यूअस स्पाइनल एनेस्थीसिया दिया गया। इससे ऑपरेशन के दौरान मरीज का ब्लड प्रेशर और हृदय की कार्यप्रणाली बिल्कुल स्थिर रही। सूक्ष्म सर्जिकल तकनीक और लगातार निगरानी से यह जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।

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इस पूरी सर्जिकल टीम का नेतृत्व ऑर्थोपेडिक्स विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. पुलक शर्मा ने किया। वहीं, एनेस्थीसिया टीम की कमान डॉ. वंशप्रिया ने संभाली। ऑर्थोपेडिक टीम में डॉ. फुरकान, डॉ. सुजीत, डॉ. अभिषेक और डॉ. विकास भी शामिल थे। इन सभी के तालमेल से यह मुश्किल सर्जरी सफल हो सकी।
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ऑपरेशन के तीन हफ्ते बाद मरीज तेजी से रिकवर कर रहे हैं। उन्होंने सहारे के साथ चलना शुरू कर दिया है। वह अपने रोजमर्रा के ज्यादातर काम अब खुद करने लगे हैं।
चिकित्सकों की टीम ने SGPGIMS के निदेशक प्रो. (डॉ.) आर. के. धीमन का विशेष आभार जताया। टीम ने बताया कि संस्थान में मौजूद अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर और सुपर-स्पेशियलिटी विभागों के सहयोग से ही यह सर्जरी मुमकिन हो पाई है। इस तरह की जटिल सर्जरी केवल उन्हीं चुनिंदा टर्शियरी केयर (Tertiary Care) अस्पतालों में संभव है, जहां अत्याधुनिक आधारभूत संरचना मौजूद हो।




