SGPGI: CVTS विभाग का 39वां स्थापना दिवस, Heart Valve रोगों की जटिल सर्जरी पर हुआ मंथन

लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS) के कार्डियोवैस्कुलर एवं थोरैसिक सर्जरी (CVTS) विभाग ने अपना 39वां स्थापना दिवस मनाया। “हृदय वाल्व रोगों का प्रबंधन – एक पुनर्मूल्यांकन” (Management of Heart Valve Diseases – A Reappraisal) थीम पर आयोजित समारोह में देश के प्रमुख मेडिकल संस्थानों और अस्पतालों के विशेषज्ञ एक मंच पर जुटे। सभी ने हृदय वाल्व रोगों के इलाज और सर्जरी की नई तकनीकों पर अपने अनुभव साझा किए।
पहले दिन हुईं जटिल सर्जरी की कार्यशालाएं
समारोह के पहले दिन का मुख्य आकर्षण तीन विशेष कार्यशालाएं (Workshops) रहीं। इनमें प्रतिभागियों को एओर्टिक रूट एनलार्जमेंट, एओर्टिक रूट रिप्लेसमेंट और रॉस ऑपरेशन (Ross Procedure) जैसी जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं की बारीकियां सिखाई गईं।

इन मुश्किल सर्जरी के लिए शरीर की संरचना (Anatomy) की गहरी समझ और उच्च तकनीकी कौशल बहुत जरूरी होता है। इन कार्यशालाओं का संचालन नारायणा हृदयालय (कोलकाता) के डॉ. अतनु साहा और सिम्स हॉस्पिटल (चेन्नई) के डॉ. मोहम्मद इदरीस ने किया। संस्थान और लखनऊ के विभिन्न सर्जनों ने इसमें भारी उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
प्रो. पी. के. मित्तल को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’
समारोह के दूसरे दिन बच्चों से लेकर वयस्कों तक की वाल्व शल्य प्रक्रियाओं पर गहन चर्चा हुई। जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी के प्रो. प्रसन्ना सिम्हा ने “प्रो. पी. के. घोष स्मृति व्याख्यान” प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर एसजीपीजीआई के CVTS विभाग के पूर्व एचओडी प्रो. पी. के. मित्तल को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान यूपी में पहली बाल और नवजात कार्डियक सर्जरी प्रोग्राम शुरू करने के लिए दिया गया। वहीं, विभाग के पूर्व छात्र और वर्तमान में नारायणा हृदयालय में कार्डियक सर्जरी के निदेशक डॉ. ललित कपूर को “मोस्ट आउटस्टैंडिंग एलुमनाई अवॉर्ड” से नवाजा गया।

नई तकनीकों और जोखिमों पर हुई चर्चा
कार्यक्रम में प्रो. के. एस. अय्यर (नई दिल्ली), डॉ. सुरेश राव (मुंबई), डॉ. देबाशीष दास (कोलकाता) और डॉ. आशीष कटेवा (फरीदाबाद) ने बाल रोगियों की जटिल वाल्व सर्जरी पर अपने विचार रखे।
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इसके अलावा, कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई:
- डॉ. राकेश नाइक (बेंगलुरु): मिनिमली इनवेसिव माइट्रल वाल्व सर्जरी पर बात की।
- डॉ. बुद्धादित्य चक्रवर्ती (जयपुर): TAVI विफल होने की स्थिति में इलाज और सर्जिकल वाल्व रिप्लेसमेंट पर चर्चा की।
- डॉ. प्रदीप नारायण (कोलकाता): वैश्विक आंकड़ों के आधार पर TAVR से जुड़े जोखिमों की जानकारी दी।
- डॉ. रविन्दर सिंह राव (जयपुर): ट्रांसकैथेटर माइट्रल वाल्व थेरेपी के अनुभव साझा किए।
‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बना CVTS विभाग
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि AIIMS (नई दिल्ली) के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. वी. देवगौरू रहे। उन्होंने इस वैज्ञानिक आयोजन की सराहना करते हुए इसे ज्ञान साझा करने का एक बेहतरीन मंच बताया।
एसजीपीजीआई के निदेशक पद्मश्री डॉ. आर. के. धीमन ने सफल आयोजन के लिए CVTS टीम को बधाई दी। उन्होंने मरीजों की देखभाल, रिसर्च और इनोवेशन में विभाग के शानदार काम की तारीफ की। डॉ. धीमन ने कहा कि अपने उत्कृष्ट कार्यों की बदौलत ही यह विभाग आज कार्डियक सर्जरी में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बन चुका है।




