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गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए बने ‘वेंटिलेटर कमांड सेंटर’, विशेषज्ञों ने सरकार को दिया सुझाव

लखनऊ। गंभीर अवस्था में पहुंचे मरीजों को वेंटिलेटर बेड के लिए दर-दर न भटकना पड़े, इसके लिए प्रदेश में ‘वेंटिलेटर कमांड सेंटर’ स्थापित करने की मांग उठी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आपात स्थिति में मरीज का एक-एक मिनट कीमती होता है। ऐसे में यदि एक केंद्रीकृत प्रणाली बने, तो मोबाइल ऐप या हेल्पलाइन नंबर के जरिए तीमारदारों को खाली वेंटिलेटर बेड की तुरंत जानकारी मिल सकेगी। इससे मरीज को सीधे सही अस्पताल पहुंचाकर समय रहते जान बचाई जा सकेगी।

यह अहम सुझाव डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के एनेस्थीसिया विभाग की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में सामने आया। कार्यक्रम में राजधानी के शीर्ष अस्पतालों के क्रिटिकल केयर मेडिसिन विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और आपातकालीन सेवाओं के ढांचे को सुदृढ़ करने पर मंथन किया।

कोरोना काल की तर्ज पर बने व्यवस्था

लोहिया संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. दीपक मालवीय ने कहा कि वेंटिलेटर बेड की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिला या राज्य स्तर पर एक ठोस तंत्र तैयार किया जाना चाहिए। वहीं, एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. पीके दास ने कहा कि वेंटिलेटर की तलाश में परिजन अक्सर कई अस्पतालों के चक्कर काटते हैं। इस भागदौड़ में कीमती समय बर्बाद होता है। यदि कमांड सेंटर के जरिए वास्तविक स्थिति (रियल-टाइम डेटा) उपलब्ध हो, तो गंभीर मरीजों को बिना देरी भर्ती कराया जा सकेगा।

गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए बने 'वेंटिलेटर कमांड सेंटर', विशेषज्ञों ने सरकार को दिया सुझाव

चिकित्सा शिक्षा विभाग के पूर्व महानिदेशक डॉ. डीएस नेगी ने याद दिलाया कि कोरोना महामारी के दौरान कमांड सेंटर ने बेहद प्रभावी भूमिका निभाई थी। शासन को उसी मॉडल पर वेंटिलेटर कमांड सेंटर स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए बने 'वेंटिलेटर कमांड सेंटर', विशेषज्ञों ने सरकार को दिया सुझाव

संक्रमण से बचाव और कर्मचारियों की ट्रेनिंग जरूरी

कार्यक्रम में क्रिटिकल केयर सेवाओं के दौरान स्वच्छता और कर्मचारियों के प्रशिक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। विशेषज्ञ डॉ. यश जावेरी ने कहा कि क्रिटिकल केयर यूनिट में तैनात डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और सफाईकर्मियों को नियमित अंतराल पर आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण मिलना चाहिए।

डॉ. मुस्तहसिन ने जोर देकर कहा कि वेंटिलेटर पर भर्ती मरीज पूरी तरह स्वास्थ्यकर्मियों पर निर्भर होते हैं। ऐसे में आईसीयू और वेंटिलेटर वार्ड में संक्रमण रोकथाम के कड़े मानकों का पालन अनिवार्य है।

इस संगोष्ठी में एसजीपीजीआई के डॉ. तन्मय घटक, डॉ. सुजीत राय, डॉ. मनोज त्रिपाठी और डॉ. मीना जौहरी समेत कई वरिष्ठ चिकित्सक मौजूद रहे।

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