इंटरैक्टिव प्रणाली लागू की जाएगी : प्रो जे.पी सैनी

उच्च शिक्षा विषयक पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन
लखनऊ। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद लखनऊ महानगर व लखनऊ विश्विद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में विकसित भारत के लिए उच्च शिक्षा विषयक एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया ।
एक दिवसीय संगोष्ठी को 4 सत्रों में विभाजित किया गया ।
जिसके प्रथम व उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि लखनऊ विश्विद्यालय के कुलपति प्रो० जे.पी सैनी मुख्य वक्ता अभाविप के विशेष आमंत्रित सदस्य प्रो.राज शरण शाही,विशिष्ट अतिथि एक्टू वास्तुकला संकाय की डायरेक्टर प्रो.वंदना सहगल व कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अभाविप लखनऊ महानगर के अध्यक्ष डॉ.अशोक मोरल उपस्थित रहे।
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल पर अपने संबोधन में प्रो ०जे.पी सैनी ने कहा यूजीसी (1956), ऐक्ट (1987) और एनसीईटी (1993) अधिनियमों को निरस्त कर यह विधेयक बिखरे हुए और परस्पर विरोधी नियमन को समाप्त करता है तथा उसके स्थान पर एक एकीकृत नियामक ढाँचा स्थापित करता है। इससे अनुपालन की जटिलता में उल्लेखनीय कमी आएगी, संस्थानों का ध्यान शैक्षणिक उत्कृष्टता पर केंद्रित होगा और संचालन की सुगमता के लिये एकल-खिड़की आधारित इंटरैक्टिव प्रणाली लागू की जाएगी।
एनएपी 2020 और विकसित भारत के साथ संतुलन: यह विधेयक स्वायत्तता, बहुविषयकता और भारतीय ज्ञान प्रणालियों के मूल सिद्धांतों को समाहित करते हुए एनएपी 2020 की उच्च शिक्षा संबंधी परिकल्पना को साकार करने का प्रमुख विधायी माध्यम है।
अनुसंधान, नवाचार और सकल नामांकन अनुपात को प्रोत्साहित कर यह उच्च गुणवत्ता वाली ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण में सहायक होगा और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को मज़बूती प्रदान करेगा।
खगोल शास्त्र में आर्यभट्ट के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गणित के अलावा, आर्यभट्ट ने खगोल विज्ञान में भी कई महत्वपूर्ण खोजें और आविष्कार किए। आर्यभट्ट की खगोलीय प्रणाली को औदायक प्रणाली के नाम से जाना जाता था। वैज्ञानिकों ने उनकी खोजों के आधार पर कई महत्वपूर्ण खोजें कीं, जैसे कि सौर मंडल के ग्रह और चंद्रमा केवल सूर्य के प्रकाश से ही प्रकाशित होते हैं। उन्होंने यह सिद्धांत भी दिया कि पृथ्वी केवल अपनी धुरी पर ही घूमती है।
खगोल विज्ञान में आर्यभट्ट के कुछ महत्वपूर्ण योगदान इस प्रकार हैं।
मुख्य वक्ता प्रो.राज शरण शाही ने भारत की आर्थर समृद्धि पर विचार व्यक्त करते हुए प्रो.शाही ने कहा भारत की प्रभावशाली आर्थिक संवृद्धि ने उम्मीद जगाई है कि देश अपनी स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष, यानी वर्ष 2047 तक ‘विकसित राष्ट्र’ का दर्जा प्राप्त कर सकता है। हालाँकि, इस आकांक्षा की पूर्ति के लिये अगले 25 वर्षों के भीतर देश की प्रति व्यक्ति आय को वर्तमान 2,600 अमेरिकी डॉलर से पाँच गुना से अधिक बढ़ाकर 10,205 अमेरिकी डॉलर करने की कठिन यात्रा तय करनी होगी। इस महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य की प्राप्ति का अर्थ है प्रति व्यक्ति आय में 7.5% की वार्षिक वृद्धि दर के साथ इस अवधि में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर को 9% बनाए रखना है।
प्रो.वंदना सहगल ने चाणक्य चिकित्सा पद्धति पर प्रकाश डाला।
अभाविप लखनऊ महानगर अध्यक्ष डॉ अशोक मोरल ने उपस्थित अतिथियों का आभार ज्ञापन किया। संगोष्ठी में लखनऊ महानगर व बाराबंकी, अयोध्या, बाराबंकी, गोंडा, सीतापुर से प्राध्यापकों ने सहभाग किया।
कार्यक्रम में अभाविप पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय संगठन मंत्री घनश्याम शाही,अवध प्रांत अध्यक्ष प्रो.नीतू सिंह संगठन मंत्री अंशुल विद्यार्थी,उपाध्यक्ष प्रो.मंजुला उपाध्याय,वरुण छाछर, शालिनी शाहिनी,
छात्र शक्ति पत्रिका के क्षेत्र संयोजक विकास तिवारी सहित तमाम छात्र एवं छात्राएं उपस्थित रही।




