इंटरलॉकिंग नेलिंग से जोड़ी पैर की टूटी हड्डी

गरीब मरीज का किया मुफ्त इलाज
Lucknow: दुर्घटना में घायल एक मरीज की बलरामपुर अस्पताल (Balrampur Hospital) के चिकित्सकों ने इंटरलॉकिंग नेलिंग (Interlocking nailing) तकनीकी से सफल सर्जरी की। मरीज के पैर की सबसे बड़ी हड्डी टिबिया जो की एक्सीडेंट में टूट गयी थी उसे इस विधि से जोड़ा गया। डॉॅक्टरों का कहना है कि मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है।
इस सफल आपरेशन टीम के वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरूर अली (Dr. Suroor Ali) ने बताया कि मरीज के 50 वर्षीय मरीज अशोक कुमार सडक़ हादसे में घायल हो गये थे। लावरिस हालत में उन्हें बलरामपुर अस्पताल लाया गया था। उन्हें बायें पैर में फ्रैक्चर था। जांच की तो पता चला कि उन्हें टिबिया हड्डी टूट गयी है। फौरन आपरेशन का फैसला किया गया। चूंकि मरीज लावरिस स्थिति में अस्पताल आया था, तो उसके इलाज का जिम्मा अस्पताल प्रशासन ने उठाया। मरीज की टूटी हड्डी को जोडऩे के लिए इंटरलॉकिंग नेलिंग तकनीकी इस्तेमाल की गयी।

उन्होंने बताया कि अक्सर बड़ी हड्डी को जोडऩे के लिए यह तकनीकी अपनायी जाती है। इसका फायदा यह है कि इसमें कम चीरा लगता है और मरीज दो-तीन में ही रिकवर होने लगता है। इसमें हड्डी के अंदर एक मजबूत धातु की छड़ (Rod) डाली जाती है और उसे दोनों सिरों पर स्क्रू से लॉक कर दिया जाता है, जिससे हड्डी को जबरदस्त स्थिरता मिलती है और मरीज जल्दी चलना-फिरना शुरू कर सकता है। डा. सुरूर ने बताया कि मरीज के इलाज में करीब 7-8 हजार रूपये का खर्चा आया है, जो अस्पताल फंड से किया गया है।
अस्पताल की निदेशक डा. कविता आर्या ( Director Dr. Kavita Arya) ने कहा कि निर्धन मरीजों को बेहतर और नि:शुल्क उपचार उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी (CMS Dr. Himanshu Chaturvedi) ने बताया मरीज गरीब था और उसे फौरन इलाज की आवश्यकता थी, ऐसे में मरीज के इलाज का पूरा खर्चा अस्पताल के फंड से किया गया।
इंटरलॉकिंग नेलिंग के फायदे:-
– लंबी हड्डियों के फ्रैक्चर का मजबूत और स्थिर फिक्सेशन
– परंपरागत विधियों की तुलना में जल्द रिकवरी
– अस्पताल में कम समय तक रहना
– हड्डी के गलत तरीके से जुडऩे का खतरा कम




