आगरा: FSDA की बड़ी छापेमारी, 63 लाख की अवैध दवाएं जब्त, 3 पर FIR

आगरा: खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) उत्तर प्रदेश ने 15 जून 2026 को जारी प्रेस नोट के माध्यम से आगरा में अवैध दवा कारोबार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई का खुलासा किया है। प्रदेशवासियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण औषधियां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से FSDA आयुक्त के नेतृत्व में 25 औषधि निरीक्षकों की एक विशेष टीम गठित की गई थी। इस टीम ने आगरा के विभिन्न दवा बाजारों में व्यापक प्रवर्तन अभियान (Enforcement Drive) चलाया।
20 से अधिक परिसरों पर सघन जांच
यह अभियान 12 से 14 जून 2026 के बीच आगरा के प्रमुख दवा व्यापार केंद्रों जैसे खिनी गली, फव्वारा, संजय प्लेस और कमला नगर में चलाया गया। इस दौरान 20 से अधिक फर्मों, गोदामों और आवासीय परिसरों की सघन जांच की गई।
जांच में कोल्ड चेन के गंभीर उल्लंघन और अवैध दवाओं का बड़ा जखीरा बरामद हुआ। टीम ने ₹63 लाख से अधिक मूल्य की नकली, फिजिशियन सैंपल और सरकारी सप्लाई की औषधियां जब्त कीं। इस कार्रवाई के दौरान भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत तीन एफआईआर (FIR) भी दर्ज कराई गई हैं।

थोक की दुकानों में चल रहा था काला कारोबार
-
मनीष पंजवानी उर्फ सन्नी (ब्राइट फार्मा): गोपनीय सूचना के आधार पर राहुल विहार, दयालबाग स्थित मनीष पंजवानी के आवास पर छापा मारा गया। यहाँ बिना लाइसेंस के अत्यंत संवेदनशील जीवन रक्षक दवाएं भंडारित मिलीं, जिनमें ‘Trinbelimab’, सरकारी सप्लाई की ‘Anti-D (Rho) Immunoglobulin’ और ‘Insulin Glargine’ शामिल थीं। यह दवाएं असुरक्षित तरीके (कोल्ड चेन ब्रेक) से रखी गई थीं। आरोपी द्वारा सरकारी दवाओं पर री-लेबलिंग कर नया मूल्य प्रिंट किया जा रहा था। मौके से ₹5,20,616 की दवाएं सीज की गईं और आरोपी के विरुद्ध थाना न्यू आगरा में FIR दर्ज कराई गई। नवाबिया मार्केट स्थित उसकी थोक दुकान से भी 5 संदिग्ध नमूने लिए गए।
-
मोहम्मद शाहिद कुरेशी (मेसर्स सी एफ इंटरप्रयसीस): खिनी गली स्थित गौरव मेडिको के स्वतः निरस्त (Self-Expired) हो चुके गोदाम के लाइसेंस का अवैध इस्तेमाल मेसर्स सी एफ इंटरप्रयसीस के प्रोपराइटर मोहम्मद शाहिद कुरेशी द्वारा किया जा रहा था। इस अवैध गोदाम से अनुमानित ₹40 लाख की समस्त औषधियां सीज कर दी गईं और 3 नमूने लिए गए।
-
सुमित माधवानी का अवैध गोदाम: माहेश्वरी व जैन कॉम्प्लेक्स स्थित सुमित माधवानी के दो अवैध गोदामों से भारी मात्रा में ‘Physician Samples – Not For Sale’ बरामद हुए। इन दवाओं को किसी भी प्रकार से बेचा नहीं जा सकता है और न ही मौके पर कोई लाइसेंस या क्लिनिक संबंधी अभिलेख मिले। ₹12 लाख मूल्य की अवैध औषधियां सीज की गईं, 08 नमूने लिए गए और थाना कोतवाली (फाउन्टैन) में BNS के तहत FIR दर्ज की गई।
-
सुमित गुप्ता का अवैध गोदाम: बहोरे राम मार्केट में भी बिना किसी लाइसेंस के बिक्री के उद्देश्य से भंडारित भारी मात्रा में ‘Physician Samples’ पाए गए। ₹15 लाख मूल्य की दवाएं सीज कर 12 नमूने लिए गए और सुमित गुप्ता के विरुद्ध थाना कोतवाली (फाउन्टैन) में FIR दर्ज कराई गई।

अन्य मेडिकल स्टोरों पर कार्रवाई का विवरण
अभियान के दौरान कई अन्य प्रतिष्ठानों पर भी विधिक कार्रवाई की गई:
-
पोरवाल मेडकेयर: भंडारित क्लिंडामाइसिन (clindamycin) इंजेक्शन का कोल्ड चेन ब्रेक पाए जाने पर ₹7,63,680 का स्टॉक सीज किया गया।
-
सर्वेश्वर फार्मा: क्रय-विक्रय अभिलेखों में अनियमितता मिलने पर 3 नमूने लिए गए और धारा 22(1)डी के तहत इन दवाओं की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी गई।
-
हाले का सहारा एंटरप्राइज: क्रय-विक्रय अभिलेखों में अनियमितता पर 3 संदिग्ध नमूने संग्रहित कर रिपोर्ट भेजी गई।
-
साईं कृपा डिस्ट्रीब्यूटर, माधव कृपा एजेंसीज और दुर्गा मेडिकोस: इन तीनों प्रतिष्ठानों से जांच हेतु संदिग्ध औषधियों के नमूने संग्रहित किए गए हैं।
मई-जून 2026 में अब तक की कुल कार्रवाई
FSDA द्वारा जनपद आगरा में मई-जून 2026 के दौरान अब तक ₹3.63 करोड़ से अधिक मूल्य की अवैध, नकली और सरकारी औषधियां जब्त की जा चुकी हैं और कुल 04 FIR दर्ज की गई हैं। इससे पूर्व 22-24 मई को ज्योति ड्रग हाउस और श्री मेडिकल एजेंसीज पर अभियान चलाकर ₹3 करोड़ की दवाएं जब्त की गई थीं, जिसमें 6 नामजद आरोपियों (नारायण दास हँसराजनी, किशोर मेहता, पुनीत कटार, सुरेन्द्र गुप्ता, मयंक गुप्ता, अन्नू अरोरा व संयम अरोरा) के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। इन मामलों में औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम 1940 तथा BNS के अंतर्गत विधिक कार्रवाई जारी है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त ने 11 जून को आगरा के सभी मेडिकल एसोसिएशनों, दवा मंडी के भवन स्वामियों और जिला प्रशासन के साथ बैठक की थी। इस बैठक में सभी थोक विक्रय प्रतिष्ठानों का सत्यापन कराने और लम्बे समय से निष्क्रिय लाइसेंस व शटर बंद प्रतिष्ठानों को निरस्त करने के निर्देश दिए गए थे।
भवन स्वामियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया था कि उनके प्रतिष्ठान पर वैध किरायेदार ही काबिज हो और उसके पास वैध लाइसेंस हो। साथ ही, प्रतिष्ठान पर फर्म का नाम व लाइसेंस नंबर अनिवार्य रूप से अंकित कराने के निर्देश दिए गए। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी दवा का अवैध भंडारण करते हुए पाया जाता है, तो पूरा स्टॉक जब्त करते हुए कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।



